पटना। बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष केवल दर्शक बनकर नहीं रहेगा, बल्कि पांचवीं सीट के लिए मजबूती से चुनाव लड़ेगा। गुरुवार को पटना में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में तेजस्वी ने महागठबंधन के घटक दलों के साथ भावी रणनीति पर चर्चा की।

​संख्या बल का गणित और विपक्षी दांव

​राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान में 202 विधायकों वाली विधानसभा के गणित के अनुसार, 5 में से 4 सीटें एनडीए के पाले में जाती दिख रही हैं। महागठबंधन के पास अभी कुल 35 विधायक (राजद-25, कांग्रेस-6, माले-2, सीपीएम-1, आईआईपी-1) हैं। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए तेजस्वी की नजरें AIMIM के 5 और बसपा के 1 विधायक पर हैं। यदि ये 6 विधायक साथ आते हैं, तो विपक्ष का आंकड़ा 41 तक पहुंच जाएगा, जिससे चुनाव में कड़ा मुकाबला तय है।

​अमित शाह पर निशाना और सुरक्षा पर सवाल

​बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब तेजस्वी ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने खुद सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया है कि बिहार में कोई घुसपैठिया नहीं है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शाह का असली निशाना बंगाल और असम के चुनाव हैं। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सरकार के पास वित्तीय संकट व अपराध जैसे ज्वलंत मुद्दों का कोई जवाब नहीं है।

​जल्द होगा उम्मीदवार का ऐलान

​आईआईपी नेता आईपी गुप्ता ने विश्वास जताया कि विपक्ष एकजुट है और जल्द ही साझा उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी। यदि विपक्ष अपना उम्मीदवार उतारता है, तो पांचवीं सीट के लिए मतदान होना निश्चित है।