प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों में आम जनता की सुविधा के लिए अधिकारी एवं कर्मचारियों के पहुंचने का समय सुबह 10 से शाम 6 बजे तक निर्धारित है। इस नियम का कड़ाई से पालन करवाने मध्यप्रदेश शासन ने आदेश जारी किया है। इस आदेश के पालन और अधिकारी-कर्मचारियों के समय पर दफ्तर पहुंचने का रियलिटी चेक लल्लूराम डॉट काम और न्यूज 24 एमपी सीजी की टीम ने शुक्रवार को किया।

परवेज खान, शिवपुरी। यहां 10 बजे के बाद भी कलेक्ट्रेट कार्यालय में ताले लटके मिले। कलेक्टर , डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी भी नहीं पहुंच थे।

अनिल मालवीय, सीहोर। जिला मुख्यालय में महिला एवं बाल विकास विभाग का तो 10.10 मिनट तक ताला ही नहीं खुला था।

कर्मचारी दफ्तर के बजाए सीधे फील्ड में जाते

बलवंत भट्ट, मंदसौर। सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों पर समय पर दफ्तर पहुंचने की सख्ती का असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। सरकारी कार्यालयों का रियलिटी चेक किया तो अधिकारी 10 बजे अपने कार्यालय पर पहुंचने लगे और कर्मचारियों पर भी सख्ती कर रहे थे। कई अधिकारी-कर्मचारी दफ्तर के बजाए सीधे फील्ड में जाते हैं उनकी भी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सीतामऊ जनपद पंचायत में रियलिटी चेक के दौरान अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी हुए आदेशों का पालन करते नजर आए।

रेणु अग्रवाल, धार। मुख्य चिकित्सा स्वास्थ विभाग में सुबह की 10 बजे चंद कर्मचारी पहुंचे थे। यहां पर उपस्थित पंजी रजिस्टर में एवं सार्थक ऐप से लगाई जाती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी अनीता सेंगर ने कहा कि हम सभी अधिकारियों कर्मचारियों को समय पर आने के लिए कहेंगे।

यहां कर्मचारी काम करते दिखे

मोहित भावसार, शाजापुर। आमजन की सुविधाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया हैं कि अब सरकारी दफ्तर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे। टीम शाजापुर के जिला पंचायत कार्यालय पहुंची तो जिला पंचायत में कई शाखाओं के बाहर 10 बजकर 05 मिनट पर भी ताले लटकते रहे। हालांकि कुछ कर्मचारी समय पर पहुंचकर अपना काम करते दिखाई दिए।

नर्मदापुरम में फाइलों पर जमी धूल, कुर्सियों से गायब कर्मचारी

दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जिले के सरकारी कार्यालयों में समयपालन की स्थिति बदहाल बनी हुई है। शुक्रवार को शहर के विभिन्न सरकारी दफ्तरों में सुबह 10 बजे के बाद तक सन्नाटा पसरा रहा। अधिकतर कुर्सियां खाली मिलीं और फरियादी अधिकारियों के आने का इंतजार करते नजर आए। कई बड़े अधिकारी और बाबू 10.15 बजे के बाद तक भी अपनी टेबल पर नहीं पहुंचे थे। कुछ कर्मचारी आए भी तो वे हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर कर चाय-नाश्ते के लिए बाहर निकल गए। एक ग्रामीण ने बताया, “हमें लगा कि साहब समय पर मिल जाएंगे तो काम जल्दी हो जाएगा, लेकिन यहां तो चपरासी के अलावा कोई बात करने वाला ही नहीं है।” यह लापरवाही तब देखी जा रही है जब हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ‘वर्क कल्चर’ सुधारने की बात कही गई थी। बार-बार दी जा रही हिदायतों के बाद भी कर्मचारियों की इस लेट-लतीफी से शासन की छवि धूमिल हो रही है।

रवि रायकवार, दतिया। यहां सुबह 10 बजे तक कोई भी अधिकारी कर्मचारी उपस्थित नहीं थे। विभाग में ताले खुल तो गए लेकिन संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं थे। यहां शासन के निर्देशों का कड़ाई से पालन करते नजर नहीं आया।

आरिफ कुरैशी, श्योपुर। न्यूज 24 की टीम जब कलेक्ट्रेट पहुंचीं तो जमीनी हकीकत कुछ उलट नजर आई। हकीकत ये थी कि 10 बजे महिला एवं बाल विकास विभाग में ताला लगा हुआ था। खाद आपूर्ति विभाग में भी ताला बंद मिला। कई दफ्तर खुले तो थे लेकिन उनमें कर्मचारी अधिकारी मौजूद नहीं थे।

अधिकारी-कर्मचारी बाहर से आना-जाना करते

अनिल मालवीय, इछावर। जिला मुख्यालय सहित तहसील में अधिकारी और कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंचे। खाली दफ्तर देखकर मजबूरी में लोग वापस लौट गए। इछावर तहसील में स्थिति का जायजा लिया तो एसडीएम कार्यालय, जनपद पंचायत सीईओ कार्यालय और महिला बाल विकास विभाग सहित कई अन्य विभागों में सुबह 10.20 बजे तक भी कोई अधिकारी -कर्मचारी उपस्थित नहीं थे। सूत्र बता रहे हैं कि अधिक अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय पर निवास नहीं करते हैं। अन्य जगह से आवागमन करते हैं जिसके कारण सरकारी दफ्तर में पहुंचने तक लेट हो जाता है। वापस भी जल्दी लौट जाते हैं।

मलेरिया विभाग में कर्मचारी नदारद, दफ्तर में नहीं घड़ी

प्रदीप मालवीय, उज्जैन। टीम जब उज्जैन स्थित जिला मलेरिया विभाग के दफ्तर में पहुंची तो यहां 10 बजकर 20 मिनट तक जिला मलेरिया अधिकारी दिनेश्वर सिंह सिसोदिया अपनी सीट से नदारद दिखाई दिए। इसके साथ ही विभाग का आलम यह था कि यहां 8 लोगों के स्टाफ में 3 लोग ही पहुंचे थे। मौजूद कर्मचारियों से चर्चा की तो उन्होंने फील्ड का हवाला देते हुए विभाग की गलती छुपाने की कोशिश की। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे मलेरिया विभाग में कही भी घड़ी नहीं दिखाई दी। हालांकि जिला मलेरिया विभाग में कुल 63 अधिकारी-कर्मचारी पदस्थ है, जिनमें से 8 अधिकारी-कर्मचारी विभाग में ही रहते है। लेकिन सुबह 10 बजकर 30 मिनट तक 4 कर्मचारियों की ही विभाग में उपस्थिति दिखाई दी।

जरूरी कामकाज ठप रहा

सुरेश पांडेय, सिंगरौली। यहां परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय सोमवार को सुबह 10 बजे के बाद भी नहीं खुला। लोगों का कहना है कि समय पर कार्यालय न खुलने से जरूरी कामकाज ठप रहा। वहीं, जब परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो कॉल रिसीव नहीं किया, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए।

जनपद में सन्नाटा, जिला कार्यालय खाली

अभय मिश्रा, मऊगंज। प्रदेश में प्रशासनिक कसावट को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ संदेश दिया है- सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। अन्यथा सिक्स डे वर्किंग सिस्टम भी लागू किया जा सकता है। जिला मऊगंज में जमीनी हकीकत कुछ और ही रही। टीम ने तीन प्रमुख कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया, जहां हालात चौंकाने वाले मिले।

अस्पताल में 10 में से सिर्फ 2 डॉक्टर मौजूद

जनपद पंचायत में चौकीदार तो समय पर मौजूद मिला, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी नदारद रहे। कार्यालय में सन्नाटा पसरा था, कई कक्षों में ताला लटका मिला। महिला एवं बाल विकास जिला कार्यालय में कक्ष खाली पड़े थे। इसी तरह सिविल अस्पताल में ड्यूटी बोर्ड पर 10 डॉक्टरों के नाम दर्ज थे, लेकिन मौके पर मात्र 2 डॉक्टर ही उपस्थित मिले। रेबीज जैसे गंभीर उपचार के लिए मरीज कई दिनों से अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग इंजेक्शन के लिए भटकते दिखे।
कुछ मरीजों ने बताया कि वे एक दिन पहले भी आए थे, लेकिन डॉक्टर के अभाव में बैरंग लौटना पड़ा।

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