राजधानी दिल्ली में साल 2023 में यमुना नदी में आई भयंकर बाढ़ जैसी स्थिति से बचाव के लिए दिल्ली सरकार अब जापान के मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, जापान ने 20 साल पहले टोक्यो के आसपास की नदियों में आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए लंबी सुरंगों के माध्यम से पानी को अंडरग्राउंड रिजर्वायरों में मोड़ने का काम किया था। इस तकनीक की मदद से बाढ़ का पानी सुरक्षित तरीके से जमा किया गया और आसपास की खेती व बसी हुई जगहें सुरक्षित रही।
दिल्ली प्रशासन का मकसद है कि यमुना नदी में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में शहर और खेती दोनों को सुरक्षित रखा जा सके और बाढ़ जैसी आपदा की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। अधिकारियों ने कहा कि इस मॉडल पर अध्ययन जारी है और इसे राजधानी में लागू करने के लिए तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर उपायों की योजना बनाई जा रही है।
पानी रोकने के लिए बनाए जा रहे बांध
अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश के दौरान नदियों के किनारे बनाए गए ऊंचे बांध पानी को रोकने में मदद कर रहे हैं, जिससे उनका ऊपर से बहना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, यमुना के उपरी प्रवाह क्षेत्र में नए बांधों के निर्माण पर भी प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। इनमें रेणुकानी, किशाऊ, लखवार-व्यासी और हथनीकुंड जैसे स्थान शामिल हैं। इन बांधों के बनने से बाढ़ का पानी नियंत्रित रूप से संग्रहित होगा और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा कम होगा।
कमिटी ने दिया सुझाव
राजधानी दिल्ली में यमुना नदी में बाढ़ जैसी स्थिति से बचाव के लिए जल शक्ति मंत्रालय ने कदम उठाए हैं। सिंचाई व बाढ़ विभाग के अफसरों के अनुसार, साल 2023 में यमुना में आई भारी बाढ़ का पानी आईटीओ तक पहुँच गया था, जिससे राजधानी में हालात तनावपूर्ण हो गए थे। बाढ़ से बचाव के लिए जल शक्ति मंत्रालय के वॉटर रिसोर्स, रिवर डिवेलपमेंट और गंगा रेजुवेनशन डिपार्टमेंट ने मिलकर एक जॉइंट फ्लड मैनेजमेंट कमिटी बनाई है। कमिटी ने यमुना में बाढ़ को नियंत्रित करने और नदियों के किनारे के क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें बांधों का निर्माण, नदी के उपरी प्रवाह में नियंत्रण और जापान के मॉडल जैसी तकनीकों को अपनाना शामिल है।
यमुना नदी में बाढ़ जैसी आपदा से बचाव के लिए पूर्वी और पश्चिमी तटों का निर्माण पहले 1978 की बाढ़ के बाद किया गया था। सिंचाई और बाढ़ विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1978 की बारिश की तुलना में साल 2023 में लगभग 23.8% अधिक बारिश हुई थी। इसके चलते यमुना में पानी का प्रवाह 6999 क्यूमेक (2,40,135.69 क्यूसेक) तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यमुना में पानी 6700 क्यूमेक तक भी पहुँचता है, तो 1978 में बने बांधों के ऊपर से पानी बहने लगता है। इसलिए भविष्य में यमुना में बाढ़ से बचाव के लिए बांधों को और ऊँचा करना जरूरी है।
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