कुंदन कुमार/पटना। राजधानी में इस वक्त सियासी हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं ने न केवल बिहार की राजनीति में उबाल ला दिया है, बल्कि उनकी अपनी पार्टी JDU के भीतर भी विरोध के स्वर मुखर कर दिए हैं। जैसे ही यह खबर फैली कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली का रुख कर सकते हैं और राज्यसभा जा सकते हैं, पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) के बाहर जेडीयू कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर गहरी नाराजगी और चिंता है। समर्थकों का कहना है कि नीतीश कुमार बिहार की पहचान हैं और उन्हें बीच राह में प्रदेश की जिम्मेदारी नहीं छोड़नी चाहिए।

महाराष्ट्र जैसा खेल – बीजेपी पर साधा निशाना

​प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच भाजपा को लेकर भी काफी आक्रोश देखा गया। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि बिहार में भी महाराष्ट्र जैसी पटकथा दोहराने की कोशिश की जा रही है। उनका मानना है कि बीजेपी एक सुनियोजित रणनीति के तहत नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर कर रही है ताकि राज्य की सत्ता पर पूरी तरह काबिज हो सके। कार्यकर्ताओं ने साफ कहा, बिहार में खेला करने की कोशिश हो रही है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

​मुख्यमंत्री आवास के बाहर डटे समर्थक

​हाथों में झंडे और अपनी बात कहते पोस्टर्स के साथ, जेडीयू के जमीनी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास के बाहर जमे हुए हैं। उनकी मांग स्पष्ट है: नीतीश कुमार राज्यसभा जाने का विचार त्याग दें और बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्यकाल जारी रखें। नेताओं का कहना है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र में जाते हैं, तो बिहार में पार्टी के अस्तित्व और भविष्य पर संकट खड़ा हो सकता है।