केंद्र ने विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर के पदों पर बड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं। इस क्रम में दिल्ली के नए लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में तरणजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) को नियुक्त किया गया है। इस बदलाव के तहत, अब तक दिल्ली की कमान संभाल रहे विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया है। साथ ही महाराष्ट्र के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी जिष्णु देव वर्मा, बिहार के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैय्यद अता हसनैन, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी कविंदर गुप्ता, जो इससे पहले लद्दाख के उपराज्यपाल थे। केंद्रीय प्रशासन ने इन बदलावों को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नेतृत्व और प्रशासनिक कार्यों को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया है।
राष्ट्रपति भवन ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा की है। दिल्ली के नए लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में तरणजीत सिंह संधू को नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही, अब तक दिल्ली की कमान संभाल रहे वीके सक्सेना को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण लद्दाख क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वीके सक्सेना ने दिल्ली में अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों का नेतृत्व किया। अब वे लद्दाख में सुरक्षा और विकास संबंधी अहम जिम्मेदारियां संभालेंगे।
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से साझा की गई। यह बदलाव लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के पद से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों बाद सामने आया। कविंदर गुप्ता ने महज 9 महीने के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दे दिया। उन्हें 14 जुलाई 2025 को लद्दाख का लेफ्टिनेंट गवर्नर नियुक्त किया गया था। कविंदर गुप्ता जम्मू-कश्मीर के भाजपा के कद्दावर नेता हैं और उन्होंने पहले जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम का पद भी संभाला है।
राजनयिक रह चुके हैं तरनजीत सिंह संधू
तरनजीत सिंह संधू, भारतीय विदेश सेवा के अनुभवी राजनयिक हैं। उन्होंने अमेरिका में भारत के राजदूत के रूप में काम किया है, जहां उनके कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक संबंधों में काफी मजबूती देखी गई। इसके अलावा, उन्होंने कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी कार्य किया और दुनिया के कई अन्य देशों में भारत की ओर से महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं। इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल की जानकारी राष्ट्रपति भवन की ओर से साझा की गई। यह बदलाव लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद सामने आया। कविंदर गुप्ता ने महज 9 महीने के कार्यकाल के बाद इस्तीफा दिया। उन्हें 14 जुलाई, 2025 को लद्दाख का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया गया था।
सुर्खियों में रहा वीके सक्सेना का कार्यकाल
गौरतलब है कि दिल्ली के उपराज्यपाल के तौर पर वीके सक्सेना का कार्यकाल काफी चर्चा में रहा। पूर्व आम आदमी पार्टी की सरकार से उनके कई टकराव सुर्खियों में रहे। इसके अलावा, वह खादी और ग्रामोद्योग आयोग के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वीके सक्सेना का जन्म 23 मार्च, 1958 को हुआ था। वे कानपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं और उनके पास पायलट का लाइसेंस भी है।
कई राज्यपालों की जिम्मेदारियां बदली
इस बदलाव को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर उन राज्यों में जहां आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर – तरनजीत सिंह संधू
लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर – वीके सक्सेना
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल – आरएन रवि (पूर्व तमिलनाडु गवर्नर)
बिहार के राज्यपाल – रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैय्यद अता हसनैन
तमिलनाडु के राज्यपाल – राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (पूर्व केरल गवर्नर)
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल – कविंदर गुप्ता (पूर्व लद्दाख उपराज्यपाल)
तेलंगाना के राज्यपाल – शिव प्रताप शुक्ला (पूर्व हिमाचल प्रदेश गवर्नर)
नागालैंड के राज्यपाल – नंद किशोर यादव
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में राज्यपालों का यह बदलाव राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कौन हैं तरणजीत सिंह संधू?
दिल्ली के नए लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में तरणजीत सिंह संधू को नियुक्त किया गया है। संधू भारतीय विदेश सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं और उनके पास 35 साल से अधिक का अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक अनुभव है। साल 2020 से 2024 तक अमेरिका में भारत के एंबेसडर रहे। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका के रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक संबंधों को मजबूत किया गया। साल 2013 से 2017, वाशिंगटन डीसी में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन के रूप में कार्य किया और इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2014 की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा की नींव रखी। उन्होंने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त और जर्मनी में काउंसुल जनरल के रूप में जिम्मेदारी निभाई।
साल 2025 में एशिया ग्रुप के सीनियर एडवाइजर बने और भारत-अमेरिका व्यापार एवं रक्षा नीतियों के सलाहकार के रूप में काम किया। सितंबर 2011 से जुलाई 2013 तक फ्रैंकफर्ट में भारत के महावाणिज्यदूत रहे। दिसंबर 2000 से सितंबर 2004 तक कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग में राजनीतिक विंग के प्रमुख के रूप में कार्य किया।
शिक्षा और पृष्ठभूमि:
संधू ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से ही पूरी की। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में पोस्टग्रेजुएशन किया। इससे पहले सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली से हिस्ट्री में ऑनर्स किया। वे वरिष्ठ IFS अधिकारी हैं और उनकी शादी रीनत संधू से हुई है।
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