हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में मौतों का रहस्य अभी भी बरकरार है। मामले में सामने आई दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी मौत के असली कारण को साफ नहीं किया है। रिपोर्ट में कई चिकित्सीय तथ्य दर्ज किए गए हैं, लेकिन सबसे अहम सवाल यह कि मौत आखिर किस वजह से हुई ? इसका जवाब अब भी नहीं मिला।
हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका
याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सरकार के तर्कों पर भी सवाल खड़े हुए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज सोनी ने दलील दी कि जब कोरोना महामारी के दौरान मौतों के मामलों में पोस्टमार्टम कराए गए थे, तो भागीरथपुरा में हुई मौतों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए थी। उनका कहना है कि यदि पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता, तो सरकार यह कहकर जिम्मेदारी से बच सकती थी कि मौतें सामान्य थीं और मुआवजे की जरूरत नहीं है।
‘वर्बल ऑटोप्सी’ पर भी उठा विवाद
सुनवाई के दौरान सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी की ओर से इस्तेमाल किए गए “वर्बल ऑटोप्सी” शब्द को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। इसका मतलब यह बताया गया कि अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर मौत दर्ज कर ली गई, जबकि मौत के कारण की विधिवत पुष्टि नहीं हुई थी।
पति ने मांगा शव, अस्पताल ने कराया पोस्टमार्टम
मामला 74 वर्षीय मंजुला वाटे की मौत से जुड़ा है। पति दिगंबर वाटे जब पत्नी का शव लेने अस्पताल पहुंचे तो प्रशासन ने पोस्टमार्टम कराने की बात कही। दिगंबर इस प्रक्रिया के पक्ष में नहीं थे, लेकिन अस्पताल का कहना था कि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मौत दूषित पानी से हुई या किसी अन्य वजह से। इसी आधार पर पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या ?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ अहम चिकित्सीय तथ्य दर्ज किए गए हैं, लेकिन मौत का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। रिपोर्ट के मुताबिक…
- पुलिस ने ऑटोप्सी रिक्विजिशन फॉर्म में मौत को दूषित पानी से जोड़ने का आरोप लगाया।
- मृतका के पेट में करीब 100 मिली पीला तरल (फ्लूड) पाया गया।
- लिवर, गॉलब्लैडर और स्प्लीन में कंजेशन पाया गया।
- विसरा को केमिकल एनालिसिस के लिए सुरक्षित रखा गया है।
- आंतों के सैंपल माइक्रोबायोलॉजी विभाग को कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं।
35 मौतें, 450 से ज्यादा लोग बीमार
भागीरथपुरा के इस कांड में अब तक 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 450 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इस पूरे मामले को लेकर सरकार पहले ही चारों तरफ से घिरी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। इससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि 29 दिसंबर की रात दूषित पानी पीने के बाद मंजुला वाटे की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हुई। पूरी रात पति उनकी देखभाल करते रहे, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई। सुबह जब मदद के लिए बाहर निकले तो नगर निगम की टीम इलाके में सर्वे कर रही थी। डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए उन्हें तुरंत एमवाय अस्पताल ले जाने की सलाह दी। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद भी मौत का कारण साफ नहीं होने से भागीरथपुरा दूषित पानी कांड एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

