पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अचानक राज्यसभा जाने का फैसला किया। इस निर्णय ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को दो धड़ों में बांट दिया है। जहां ललन सिंह जैसे दिल्ली के नेता इसे नीतीश की मर्जी बता रहे हैं, वहीं बिहार में जमीन पर काम करने वाले दिग्गज नेता इस फैसले से नाराज हैं।

​भावुक हुए दिग्गज, बंद कमरे में हुआ फैसला

​नीतीश कुमार का यह फैसला किसी लोकतांत्रिक चर्चा के बजाय बंद कमरे की मंत्रणा का नतीजा रहा। जानकारी के अनुसार, विधायक दल की बैठक बुलाए बिना ही यह तय कर लिया गया कि नीतीश मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे। इस घोषणा से वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र यादव बैठक छोड़कर जल्दी निकल गए, तो अशोक चौधरी भावुक हो उठे। खाद्य मंत्री लेशी सिंह ने स्पष्ट कहा कि उनका दिल दुख रहा है, क्योंकि वे समता पार्टी के दौर से नीतीश के साथ रही हैं।

​उत्तराधिकारी के रूप में ‘निशांत’ का उदय

​शुक्रवार को ‘एक अणे मार्ग’ पर हुई विधायक दल की बैठक में भारी मन से नेताओं ने शिरकत की। बैठक के दौरान नीतीश ने विरोध कर रहे विधायकों से कहा, “मैं राज्यसभा जा रहा हूं, लेकिन वहां से सब देखता रहूंगा।” इसी बैठक में नीतीश के बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने और पार्टी का नेतृत्व सौंपने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी ने हाथ उठाकर सहमति दी। मंत्री श्रवण कुमार ने पुष्टि की है कि अब युवा चेहरा निशांत कुमार ही जदयू की कमान संभालेंगे।

​अनिश्चितता के भंवर में कार्यकर्ता

​एमएलसी नीरज कुमार और विधायक विनय चौधरी जैसे नेताओं ने चिंता जताई है कि नीतीश के केंद्र में जाने के बाद बिहार में पार्टी का भविष्य क्या होगा? कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी है कि नीतीश ने सोशल मीडिया के जरिए इस बड़े बदलाव की सूचना दी। फिलहाल जदयू के भीतर अंदरूनी कलह और भविष्य की अनिश्चितता साफ देखी जा रही है।