Bastar News Update : दंतेवाड़ा। जावंगा स्थित लक्ष्मी मेटल एंड इंडस्ट्रीज क्रशर में 18 फरवरी को हुए अनियंत्रित ब्लास्ट मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस को पता चला है कि क्रशर का मैनेजर इजरायल ओडिशा के कोरापुट जिले की जेल में बंद है। बताया जा रहा है कि वह पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। ब्लास्ट के दौरान करीब 50-50 किलो वजनी पत्थर 300 मीटर दूर तक जा गिरे थे।

इनमें से एक पत्थर बड़े पनेड़ा की प्राथमिक शाला की छत तोड़ते हुए कक्षा में गिरा था। घटना के समय स्कूल में बच्चे मौजूद नहीं थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। ब्लास्टर और असिस्टेंट ब्लास्टर को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा जा चुका है। वहीं क्रशर संचालक टी. रमेश अब भी फरार बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक ब्लास्ट मामले में मैनेजर की भूमिका अहम मानी जा रही है। अब गीदम थाना की टीम कोरापुट जाकर आरोपी को दंतेवाड़ा लाने की तैयारी कर रही है। यहां उससे पूछताछ कर पूरे ब्लास्ट मामले की कड़ियां जोड़ी जाएंगी।
सड़कों पर मवेशियों का कब्जा, शहर में बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा
जगदलपुर शहर में इन दिनों सड़कों पर आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। मेन रोड को छोड़कर अधिकांश मार्गों पर मवेशियों का जमघट देखा जा रहा है। खासतौर पर अनुपमा चौक से धरमपुरा पीजी कॉलेज मार्ग पर मवेशी सड़क पर बैठे नजर आते हैं।
पीजी कॉलेज से कालीपुर जाने वाले मार्ग पर भी यही हाल देखने को मिल रहा है। कुम्हारपारा, शहीद पार्क, संजय बाजार और गीदम मार्ग पर भी पशुओं का डेरा लगा रहता है। नया बस स्टैंड मार्ग पर भी राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। शाम ढलते ही यह समस्या और गंभीर हो जाती है। अंधेरे में सड़क पर बैठे मवेशियों से दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। नगरपालिका द्वारा पशु पालकों पर कार्रवाई और जुर्माने की बात कही गई थी। साथ ही आवारा मवेशियों के खिलाफ धरपकड़ अभियान चलाने का दावा भी किया गया था। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। शहरवासी अब प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
तेज रफ्तार स्कॉर्पियो बनी मौत का कारण, युवक की मौके पर मौत
बस्तर जिले के चिखलपुटी बायपास मार्ग पर शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान भेलवापदर निवासी करण श्रीवास्तव के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार करण अपने दोस्तों के साथ स्कॉर्पियो में बायपास मार्ग की ओर जा रहा था। इसी दौरान मोड़ पर वाहन चालक का नियंत्रण वाहन से हट गया। जिसके बाद स्कॉर्पियो पलटकर सड़क किनारे जा गिरी। हादसे में करण श्रीवास्तव को गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना में एक अन्य युवक घायल भी हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल के शवगृह में रखवाया गया। घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
पीडब्ल्यूडी के बड़े बाबू ने सरकारी क्वार्टर में लगाई फांसी
कोंडागांव जिला मुख्यालय में पीडब्ल्यूडी विभाग के एक कर्मचारी द्वारा आत्महत्या करने का मामला सामने आया है। उप संभाग क्रमांक एक में पदस्थ बड़े बाबू लवसिंह ध्रुव ने फांसी लगाकर जान दे दी। जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम करीब 7 बजे यह घटना सामने आई। लवसिंह ध्रुव तहसीलपारा स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में रहते थे। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर सहकर्मियों को संदेह हुआ। जिसके बाद कमरे में जाकर देखा गया तो वे पंखे से साड़ी का फंदा बनाकर लटके हुए थे। तत्काल उन्हें नीचे उतारकर जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच में जुटी हुई है।
आईटीबीपी जवानों ने रक्तदान कर बचाई मासूम की जान
नारायणपुर में आईटीबीपी के जवानों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक मासूम बच्चे की जान बचाई। यह सराहनीय कार्य आईटीबीपी की 41वीं वाहिनी के जवानों ने किया। जानकारी के अनुसार 3 साल 6 महीने के पंकज सलाम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बच्चे को बी पॉजिटिव ब्लड की तत्काल जरूरत थी। लेकिन उस समय अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध नहीं था। मामले की जानकारी मिलने पर अधिकारियों ने तुरंत आईटीबीपी से संपर्क किया। इसके बाद 41वीं बटालियन के कमांडेंट नरेंद्र सिंह को स्थिति से अवगत कराया गया। कमांडेंट के निर्देश पर जवान तुरंत अस्पताल पहुंचे। सहायक निरीक्षक जगदीश सिंह और सहायक उप निरीक्षक कुंजीलाल ने रक्तदान किया। दोनों जवानों ने 300-300 मिलीलीटर रक्त देकर बच्चे की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। समय पर मिले रक्त से बच्चे का उपचार संभव हो पाया। इस मानवीय पहल की अस्पताल प्रशासन और परिजनों ने सराहना की है।
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