US-North Korea Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) मौजूदा साल के पहले दो महीनों में ही दो बड़े देशों में सैन्य अभियान कर पूरे विश्व में उथल-पुथल मचा दी है। ट्रंप ने साल की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला कर प्रेसिडेंट निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वेनेजुएला सरकार में अमेरिका का सीधा दखल है। फिर 28 फरवरी 2026 को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर हमला करते हुए वहां के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को मार दिया। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर उत्तर कोरिया (नॉर्थ कोरिया) के सुप्रीम लीडर नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) हैं।

दरअसल अमेरिका आज से (9 मार्च 2026) दक्षिण कोरिया के साथ उसने बड़े सैन्य अभ्यास ‘फ्रीडम शील्ड’ (Freedom Shield) का आगाज कर दिया है। इसमें हजारों सैनिक शामिल हो रहे हैं। इस युद्धाभ्यास के बीच हथियारों के ट्रांसफर को लेकर भी अटकलें तेज हैं। दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि फ्रीडल शील्ड में लगभग 18,000 कोरियाई सैनिक भाग लेंगे जो कि आज से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा।

अमेरिका और दक्षिण कोरिया का ये संयुक्त युद्धाभ्यास ऐसे वक्त में हो रहा है, जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में अटकलें चल रही हैं कि वाशिंगटन कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटाकर ईरान के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिकी सेना कोरिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह सैन्य संपत्तियों की विशिष्ट गतिविधियों पर टिप्पणी नहीं करेगी। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी उन रिपोर्टों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिनमें कहा गया था कि कुछ अमेरिकी पैट्रियट एंटी-मिसाइल सिस्टम और अन्य उपकरणों को मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे सहयोगी देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

नॉर्थ कोरिया पर दवाब की कोशिश

फ्रीडम शील्ड दोनों देशों द्वारा साल में दो बार आयोजित ‘कमांड पोस्ट’ अभ्यासों में से एक है। दूसरा अगस्त में उलची फ्रीडम शील्ड होता है। ये अभ्यास मुख्य रूप से कंप्यूटर सिमुलेशन पर आधारित होते हैं और संयुक्त परिचालन क्षमताओं का परीक्षण करते हैं, जिसमें बदलते युद्ध परिदृश्य और सुरक्षा चुनौतियां शामिल होती हैं। इस बार फील्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम ‘वारियर शील्ड’ के तहत 22 फील्ड अभ्यास होंगे जो पिछले साल के 51 से कम हैं।

नॉर्थ कोरिया की आपत्ति

दूसरी ओर उत्तर कोरिया फ्रीडम शील्ड अभ्यास पर आपत्ति जताता रहा है। उत्तर कोरिया अक्सर इन अभ्यासों को आक्रमण के पूर्वाभ्यास के रूप में देखता है, जिससे तनाव बढ़ने की आशंका रहती है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने पिछले महीने प्योंगयांग में एक सम्मेलन के दौरान सियोल के प्रति अपना कड़ा रुख दोहराया था। हालांकि वाशिंगटन के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखे थे। उन्होंने मांग की है कि अमेरिका परमाणु निरस्त्रीकरण की पूर्व शर्त को छोड़ दे।

न्यूक्लियर वार्ता हुई विफल

बता दें कि उत्तर कोरिया ने 2019 में अपने नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच उनके पहले कार्यकाल के दौरान हुए शिखर सम्मेलन के विफल होने के बाद वाशिंगटन और सियोल के साथ सभी सार्थक बातचीत बंद कर दी है। हाल के सालों में दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है, क्योंकि किम ने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का फायदा उठाकर अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विकास किया। साथ ही किम जोंग रूस के साथ अपने सैन्य संबंधों को मजबूत कर चुके हैं। वह यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को हथियार और सैनिक भी भेज रहे हैं, जिससे उसे युद्ध लड़ने में मदद मिली है।


अमेरिका की नई ‘युद्ध नीति’

अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों का दुश्मन देशों के नेताओं और सैन्य अधिकारियों की सीक्रेट तरीके से हत्या करने का पुराना इतिहास रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का हालिया रवैया तो अब सामान्य हो गया है। वॉशिंगटन पोस्ट के कॉलमिस्ट डेविड इग्नेशियस कहते हैं कि ‘सिर काटना’ अमेरिकी युद्ध का न्यू नॉर्मल बनता जा रहा है। बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिकी लीगल फ्रेमवर्क में बदलाव किया गया, जिसमें हथियारों से होने वाले झगड़े के कानून के हिसाब से दुश्मन के खिलाफ टारगेटेड जानलेवा ताकत का इस्तेमाल करना ‘हत्या’ नहीं माना जाएगा। यह लीगल फ्रेमवर्क किसी दूसरे देश की सॉवरेनिटी पर असर डालने की इजाजत दे देता है।

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