राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्य प्रदेश की कोई भी नगर पालिका हो या फिर नगर परिषद… सभी के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होने का खतरा मंडरा गया है। प्रदेश के दो निकाय श्योपुर और पानसेमल के अध्यक्षों पर कार्रवाई हुई है। एक नगर पालिका के अध्यक्ष के कार्यकाल पर रोक लगा दी है, जबकि एक नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित कर दिए गए हैं। दोनों मामलों में एक्शन हाई कोर्ट ने लिया है। वहीं डबरा नगर पालिका के मामले में नोटिस जारी कर अध्यक्ष से जवाब तलब किया गया है। आगे प्रदेश की सभी 395 नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्षों का एक रुपए का भी फैसला नहीं लेने का अधिकार छिन सकता है।
पहले समझिए तीन केस
- बड़वानी जिले की पानसेमल नगर परिषद
नगर परिषद और नगर पालिका अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य किए जाने की शुरुआत बड़वानी जिले की पानसेमल नगर परिषद के अध्यक्ष पद से शुरू हुई है। अध्यक्ष शैलेंद्र भंडारकर के खिलाफ पार्षद राधिका मुरली साठोड़े ने एडीजे कोर्ट में शिकायत की थी। निचली अदालत ये पिटीशन यह कहकर खारिज कर दी गई कि एप्लीकेशन प्री-मैच्योर है। मामला ग्वालियर हाईकोर्ट पहुंचा। उच्च न्यायालय ने शिकायत को सही ठहराया और नगर परिषद अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार समाप्त कर दिए गए। इधर, अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार छिनने पर सरकार ने एसडीएम को नगर परिषद के प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

- श्योपुर नगर पालिका अध्यक्ष
श्योपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव को चुनौती देते हुए एडीजी कोर्ट में याचिका दायर हुई थी। सुमेर सिंह नाम सख्श ने मुददा उठाया था। यहां भी याचिका प्री-मैच्योर बताकर खारिज कर दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट में याचिका मंजूर हुई। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए नगर पालिका अध्यक्ष रेणु गर्ग को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने से रोक दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट में रिट अपील दायर हुई। याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट में तर्क दिया कि बिना गजट नोटिफिकेशन के चलते किसी भी उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित नहीं किया जा सकता है। ऐसे में दोनों ही स्थान पर रिट पिटीशन मंजूर नहीं की गई। अब सिंगल बेंच से इसी महीने फाइनल डिसीजन आ सकता है।
- अब डबरा नगर पालिका अध्यक्ष से पूछा गया नियुक्ति का आधार
ग्वालियर जिले की डबरा नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी बाई के पद के मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने नोटिस जारी किया है। कोर्ट में लगी याचिका में अध्यक्ष पद की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसे चुनौती दी गई है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर लक्ष्मीबाई से पूछा है कि उनकी नियुक्ति किन दस्तावेजों के आधार पर हुई है।
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मध्य प्रदेश में कुल 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद हैं। अब डबरा नगर पालिका सहित प्रदेश की सभी नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर के सीनियर एडवोकेट ब्रह्ममूर्ति तिवारी का कहना है कि यदि जिन भी निकायों की शिकायतें कोर्ट पहुंचेंगी तो उनके अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित होंगे ही।
इसलिए शून्य घोषित हो रहे वित्तीय अधिकार
सीनियर एडवोकेट ब्रह्ममूर्ति तिवारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में 2022 में निकाय चुनाव हुए थे। उस दौरान ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय और पंचायत चुनाव आनन-फानन कराए। उस दौरान नगर निगमों में मेयर के चुनाव तो प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे जनता से कराए गए, लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी जनता के बजाय पार्षदों से करवाया गया।
चुनाव के बाद महापौर के साथ नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद के पार्षद का नोटिफिकेशन कर जीत-हार का ऐलान किया गया, लेकिन नगर पालिका और नगर परिषद के पार्षदों से चुने गए अध्यक्षों का नोटिफिकेशन नगरीय विकास और आवास विभाग ने नहीं किया। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का नोटिफिकेशन जारी नहीं होने से यह स्थिति निर्मित हुई है।

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