Rajasthan Gas Crisis: राजस्थान में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम आदमी की रसोई का बजट और सुकून दोनों बिगाड़ दिए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि जयपुर से लेकर जैसलमेर तक लोग गैस की जगह कोयले, लकड़ी और इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। वहीं, गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई हैं।

बता दें कि बीते दो दिनों में इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक दोगुनी हो गई है। जयपुर के व्यापारियों की मानें तो जहां पहले 2500-3000 यूनिट की बिक्री होती थी, अब वह आंकड़ा 4500 को पार कर गया है। आलम यह है कि डिमांड इतनी ज्यादा है कि बाजार में सप्लाई भी कम पड़ने लगी है।

रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट्स पर गहरा संकट

गैस की कमी का सबसे बुरा असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ा है। कोटा में मेस और हॉस्टल संचालकों को सिलेंडर नहीं मिलने से कोयले और लकड़ी की डिमांड 12 टन से बढ़कर 15 टन पहुंच गई है। उदयपुर के पिछोला झील किनारे स्थित रेस्टोरेंट ने लंच और ब्रेकफास्ट बंद कर दिया है। जैसलमेर के सम इलाके में 150 रिसॉर्ट्स पर ताला लगने की नौबत आ गई है। वहीं जयपुर में चाय की थड़ियों और ढाबों पर व्यावसायिक गैस के बजाय घरेलू सिलेंडर के अवैध इस्तेमाल की शिकायतें बढ़ गई हैं, जिसके बाद खाद्य विभाग अलर्ट मोड पर है।

प्रशासन की सख्ती और कांग्रेस का विरोध

गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने फूड विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। उदयपुर में छापेमारी के दौरान अवैध रिफिलिंग करते हुए 6 सिलेंडर जब्त किए गए। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है। सीकर में कार्यकर्ताओं ने सड़क पर चूल्हा जलाकर विरोध जताया, तो भरतपुर के बिजली घर चौराहे पर बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।

बुकिंग में भी आ रही दिक्कतें

आम उपभोक्ताओं की परेशानी तब और बढ़ गई जब भारत गैस का सर्वर ठप होने की खबरें सामने आईं। तेल कंपनियों ने भी राहत देने के बजाय नियम कड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अब सिलेंडर की अगली बुकिंग 45 दिन बाद होगी, जबकि शहरों में यह मियाद 25 दिन है।

गौरतलब है कि अगर जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो छोटे व्यवसायों का ठप होना तय है। प्रशासन की ओर से अब निगरानी बढ़ा दी गई है, लेकिन आम जनता अभी भी सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

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