BJP Jan Sunwai Jaipur: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होते ही प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें भाजपा मुख्यालय पर टिकी हैं, जहां पिछले करीब डेढ़ महीने से बंद पड़ी ‘कार्यकर्ता जनसुनवाई’ के फिर से शुरू होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बिठाने के लिए इसे एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

डेढ़ महीने से थमी थी प्रक्रिया

दरअसल, राजस्थान में भजनलाल सरकार बनने के बाद 1 दिसंबर 2025 से भाजपा मुख्यालय में मंत्री दरबार की शुरुआत हुई थी। इस व्यवस्था में हर सप्ताह सोमवार से बुधवार तक दो मंत्री और दो संगठन के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनते थे। हालांकि, बजट सत्र के कारण मंत्रियों की व्यस्तता के चलते 27 जनवरी से इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।

वसुंधरा सरकार से चली आ रही परंपरा

यह जनसुनवाई भाजपा के लिए कोई नया प्रयोग नहीं है। 2013 से 2018 के बीच वसुंधरा राजे के कार्यकाल में भी पार्टी कार्यालय में जनसुनवाई की परंपरा थी, जिसने संगठन को जमीन से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी। पार्टी के भीतर माना जाता है कि जब कार्यकर्ता सीधे मंत्रियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों तक पहुंचते हैं, तो शासन और संगठन के बीच की दूरी खत्म होती है।

जल्द शुरू होगी सुनवाई: श्रवण सिंह बगड़ी

भाजपा मुख्यालय में फिर से मंत्री दरबार को लेकर चल रही चर्चाओं पर प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा विधानसभा सत्र के कारण मंत्रियों की व्यस्तता के चलते सुनवाई रुकी थी। अब प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर इसे फिर से शुरू करने की प्रक्रिया पर मंथन चल रहा है। जल्द ही कार्यकर्ता मुख्यालय पर अपनी समस्याएं रख सकेंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि सुनवाई बिल्कुल बंद है, पदाधिकारी कार्यालय में मौजूद रहते हैं और सीएम व मंत्री अपने आवासों पर भी नियमित सुनवाई कर रहे हैं।

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