शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश के तीन टोल पर 6 गुना वसूली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर हाईकोर्ट को 3 महीने में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसे नोएडा ब्रिज टोल वसूली जैसा मामला बताया। 

दरअसल, भोपाल-देवास, लेबड़-जावरा, जावरा-नयागांव टोल रोड लागत से कई गुना अधिक वसूली की गई थी। भोपाल देवास टोल रोड की लागत 345 करोड़ थी जिसमें 2056 करोड़ रुपए की वसूली की गई थी। जावरा-नयागांव की लागत 426 करोड थी जिसमें वसूली 2635 करोड की गई थी। इसी तरह लेबड़-जावरा की लागत 589 करोड़ थी जिसके वसूली 2376 करोड़ रुपए की गई। 

15 दिन में हाईकोर्ट में नया आवेदन दाखिल करने की अनुमति 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की खंडपीठ ने पूर्व विधायक परसक सकलेचा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिए। साथ ही याचिकाकर्ता को 15 दिन के भीतर हाईकोर्ट में नया आवेदन दाखिल करने की अनुमति भी दी। सुप्रीम कोर्ट ने टोल रोड के निवेशकों और अन्य प्रभावित पक्षों को भी मामले में पक्षधर बनाने के निर्देश दिए हैं।

टोल वसूली पर गरमाई सियासत

टोल वसूली को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस प्रवक्ता फिरोज सिद्दीकी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में टोल वसूली के मामले में जितने की गाड़ी नहीं होती उससे ज्यादा टोल वसूल लिया जाता है। गाड़ी पर रोड टैक्स, इंश्योरेंस पर जीएसटी, पेट्रोल पर टैक्स फिर क्यों इतनी वसूली हो रही है। मध्य प्रदेश में अफसर और सरकार मिलकर जनता को लूट रही है।
भाजपा ने किया पलटवार

वहीं कांग्रेस के आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस सड़क की बात न करें। कांग्रेस के समय मध्य प्रदेश में सिर्फ 5 हजार किलोमीटर की सड़क थी। आज 5 लाख किलोमीटर की सड़के मध्य प्रदेश में बनी है। कांग्रेस के समय 100 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए 4 घंटे लगते थे। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लेकर उन्होंने कहा कि कोर्ट ने कहा है, उसका पूरा पालन किया जाएगा। 

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