मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की परंपरा और संस्कृति काफी पुरानी है. धीरे धीरे इसकी जगह स्टील के बर्तनों ने ले की. हालांकि पिछले कुछ समय से मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने का चलन फिर से देखने को मिला है और जो लोग इसमें खाना नहीं बनाते वो खाना रखने के लिए भी इन बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं. वैसे ही मिट्टी के बर्तन में दही जमाने की परंपरा सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे कई वैज्ञानिक और स्वास्थ्य से जुड़े फायदे भी हैं. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

दही गाढ़ाऔर स्वादिष्ट बनता है
मिट्टी के बर्तन की सतह हल्की नमी सोख लेती है, जिससे दही में अतिरिक्त पानी नहीं रहता और वह गाढ़ी व क्रीमी बनती है और खाने में बहुत स्वादिष्ट भी लगती है.

प्राकृतिक ठंडक बनाए रखता है
मिट्टी में कूलिंग प्रॉपर्टी होती है, जो दही जमने के दौरान सही तापमान बनाए रखती है—इससे दही अच्छे से सेट होती है.

पाचन के लिए ज्यादा फायदेमंद
सही तापमान में जमने से दही में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (प्रोबायोटिक्स) बेहतर तरीके से विकसित होते हैं, जो पेट के लिए लाभकारी हैं.

खटास संतुलित रहती है
मिट्टी के बर्तन में दही ज्यादा खट्टी नहीं होती, बल्कि इसका स्वाद संतुलित और हल्का रहता है.

नेचुरल और केमिकल-फ्री विकल्प
प्लास्टिक या धातु के बर्तनों के मुकाबले मिट्टी पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जिससे दही में कोई हानिकारक तत्व नहीं मिलते.

अतिरिक्त नमी को सोख लेता है
गर्मियों में खासतौर पर, मिट्टी दही को पतला होने से बचाती.

ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

नया मिट्टी का बर्तन इस्तेमाल करने से पहले उसे कुछ घंटों तक पानी में भिगो लेंहर बार इस्तेमाल के बाद अच्छे से साफ और सूखा रखेंबहुत ज्यादा ठंडी जगह पर न रखें, वरना दही ठीक से नहीं जमेगी.