Rajasthan News: राजस्थान में शनिवार को सुहाग के प्रतीक गणगौर पर्व की ऐसी छटा बिखरी कि हर कोई देखता रह गया। राजधानी जयपुर के सिटी पैलेस से जब माता की शाही सवारी निकली, तो मानों पूरा शहर त्रिपोलिया गेट पर सिमट आया हो। चांदी की पालकी में विराजमान मां गणगौर के दर्शन के लिए देसी ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी सैलानी भी पलकें बिछाए खड़े थे।

जयपुर में राजसी ठाट-बाट और लोक संस्कृति

बता दें कि पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित इस दो दिवसीय फेस्टिवल में लोक कलाकारों ने समां बांध दिया। हाथी, घोड़े और ऊंटों के काफिले के साथ माता की सवारी जनानी ड्योढ़ी से रवाना हुई।

छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार में कच्ची घोड़ी, कालबेलिया और कठपुतली नृत्य देख लोग झूम उठे। रावणहत्था, भपंग और शहनाई की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

पर्यटन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, इस बार 210 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। खास बात यह रही कि राजस्थान फाउंडेशन के जरिए इस पूरी सवारी का दुनिया भर में लाइव प्रसारण किया गया।

उदयपुर: पिछोला की लहरों पर आस्था का सैलाब

झीलों की नगरी उदयपुर में तीन दिवसीय मेवाड़ फेस्टिवल का आगाज हो गया है। ग्राउंड सूत्रों के मुताबिक, विभिन्न समाजों की गणगौर सवारियां जब ऐतिहासिक गणगौर घाट पहुंचीं, तो वहां का नजारा अद्भुत था। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर पिछोला झील के किनारे पूजा-अर्चना की और अखंड सौभाग्य की कामना की।

कुचामनसिटी में 21 जिप्सियों का टशन

नागौर के कुचामनसिटी में भी भोलावणी का उत्साह चरम पर रहा। कुचामन फोर्ट से निकली सवारी में राजपूत समाज के लोग केसरिया साफा पहनकर और हाथों में तलवार लेकर शामिल हुए। शहर में 101 जगहों पर पुष्प वर्षा की गई और 21 खुली जिप्सियों के काफिले ने इस बार मेले की रौनक को दोगुना कर दिया।

गणगौर के इस भव्य आयोजन से राजस्थान के पर्यटन को जबरदस्त बूस्ट मिला है। हालांकि, भारी भीड़ के चलते जयपुर के परकोटे और उदयपुर के पुराने शहर में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल की अगुवाई में सुरक्षा के कड़े इंतजामों ने व्यवस्था को संभाले रखा। इस पर्व ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजस्थानी संस्कृति आज भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है।

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