सोहराब आलम/ मोतिहारी। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) और इसके अधीन आने वाले सभी अंगीभूत कॉलेजों में मंगलवार से सन्नाटा पसर गया है। प्रक्षेत्रीय संघ के आह्वान पर विश्वविद्यालय के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों और संविदा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में दो दिवसीय कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। इस हड़ताल के कारण परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर प्रशासनिक फाइलों की आवाजाही तक, विश्वविद्यालय का सारा पहिया थम गया है।

​25 मार्च तक जारी रहेगा आंदोलन

​कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन 25 मार्च की शाम तक जारी रहेगा। संघ के नेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी अनदेखी की जा रही है। विरोध का स्वरूप ऐसा है कि कर्मचारी सुबह कार्यालय और महाविद्यालय परिसर में उपस्थित तो हो रहे हैं, लेकिन वे किसी भी रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे और न ही किसी आधिकारिक फाइल को हाथ लगा रहे हैं।

​प्रमुख मांगें और तालाबंदी का असर

​हड़ताली कर्मचारियों की मुख्य मांगों में बकाया वेतन का भुगतान, दैनिक वेतनभोगी कर्मियों का नियमितीकरण और सेवा शर्तों में सुधार शामिल है। विश्वविद्यालय मुख्यालय के साथ-साथ विभिन्न कॉलेजों में भी कामकाज पूरी तरह ठप होने से दूर-दराज से आए छात्रों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। काउंटर बंद होने के कारण न तो डिग्री का काम हो पा रहा है और न ही नामांकन से जुड़ी प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं।

​प्रशासनिक चुप्पी और छात्रों की दुविधा

​जहां एक तरफ कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है। यदि यह गतिरोध बुधवार शाम तक समाप्त नहीं होता है, तो आगामी परीक्षाओं की तैयारियों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, पूरा परिसर काम बंद, कलम बंद के नारों से गूंज रहा है और सभी विभागों में कामकाज की जगह केवल वीरानी नजर आ रही है।