Rajasthan News: राजस्थान की सियासत में बेटों के दखल को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बड़ा सियासी बम फोड़ दिया है। गुरुवार को जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से रूबरू होते हुए गहलोत ने सीधे तौर पर भाजपा सरकार के मंत्रियों और विधायकों को नसीहत दे डाली। दरअसल, गहलोत का इशारा भीम विधायक हरि सिंह रावत के बेटे पर लगे आरोपों और अन्य मंत्रियों के परिजनों के सरकारी कामकाज में बढ़ते हस्तक्षेप की तरफ था।

बता दें कि गहलोत ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि नेताओं के बेटों का सरकारी काम में दखल बढ़ना सरकार की छवि के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने मंत्रियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बेटों को सरकार के नजदीक लाने से वे बिगड़ सकते हैं। दरअसल, उनका मानना है कि बेटों को सरकार से दूर रखकर अच्छे संस्कार देने चाहिए, वरना ये खुद भी बिगड़ेंगे और आने वाले समय में पूरी सरकार की भारी बदनामी कराएंगे। गौरतलब है कि ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि नई सरकार में मंत्रियों के परिवार वाले सचिवालय और दफ्तरों में हावी होने लगे हैं।

प्रदेश की कानून व्यवस्था पर हमला बोलते हुए गहलोत ने मार्च महीने में हुई हत्याओं और फायरिंग की लंबी फेहरिस्त पेश कर दी। उन्होंने बताया कि जयपुर में प्रॉपर्टी डीलर पर सरेआम फायरिंग हो रही है, फलोदी और भरतपुर में सरेआम हत्याएं की जा रही हैं। यही नहीं, चूरू में होटल मालिक, सिरोही के माउंट आबू में फायरिंग और बाड़मेर में व्यापारी की हत्या जैसी वारदातों ने प्रदेश को दहला दिया है। गहलोत ने गंभीर आरोप लगाया कि ग्रामीण इलाकों में तो उत्पीड़न की खबरें सरकार की फाइलों तक पहुंच ही नहीं पा रही हैं, जो कि लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।

स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी गहलोत के तेवर नरम नहीं पड़े। उन्होंने कहा कि उनके समय शुरू हुए आईपीडी टॉवर का काम जानबूझकर लटकाया गया है। वहीं 25 लाख के मुफ्त इलाज को लेकर उन्होंने साफ किया कि यह उनकी सरकार की पुरानी योजना थी, जिसे भाजपा अब अपना बताकर पेश कर रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का उन्होंने खुले दिल से स्वागत किया और याद दिलाया कि कोविड के कठिन समय में उन्होंने भी पक्ष-विपक्ष को साथ लेकर चलने की सफल पहल की थी।

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