कुंदन कुमार/पटना। AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी एक दिवसीय दौरे पर आज बिहार की राजधानी पटना पहुंचे। एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओवैसी ने महागठबंधन के साथ भविष्य के रिश्तों महिला आरक्षण बिल और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखी।
महाबंधन को समर्थन और बी टीम का टैग
जब ओवैसी से पूछा गया कि क्या भविष्य में बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने पर वह समर्थन देंगे तो उन्होंने सधे हुए अंदाज में कहा क्या अभी सरकार बन रही है? जब बनेगी तब देखा जाएगा। वहीं कांग्रेस और ममता बनर्जी द्वारा अक्सर उन्हें भाजपा की बी टीम कहे जाने पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोगों को जो कहना है कहने दीजिए। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार विधानसभा चुनाव में भी यही आरोप लगे थे लेकिन इससे जमीनी हकीकत पर कोई फर्क नहीं पड़ा।
महिला आरक्षण बिल: अलाउद्दीन का चिराग
महिला आरक्षण बिल को लेकर ओवैसी ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार बिल को लेकर पारदर्शिता नहीं बरत रही है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा पार्लियामेंट सेशन के दिन सुबह में यह बिल अलाउद्दीन के चिराग की तरह अचानक सामने आ जाता है। ऐसे में सांसद इसे कब पढ़ेंगे और कब समझेंगे? उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह बिल 2029 के बाद लागू होना है तो इतनी जल्दबाजी और गोपनीयता क्यों? क्या पहले बिल देने से आसमान गिर जाता?
ममता बनर्जी और उर्दू मेनिफेस्टो पर प्रहार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा उर्दू में मेनिफेस्टो जारी करने को ओवैसी ने महज दिखावा करार दिया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले साल हाई कोर्ट ने 5 लाख सर्टिफिकेट रद्द किए जिनमें 3 लाख मुस्लिम पिछड़ा वर्ग के लोग थे लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि बंगाल में 29% मुस्लिम आबादी है फिर भी सबसे ज्यादा स्कूल ड्रॉप-आउट और गरीबी इसी समुदाय में है।
ओवैसी ने जाते-जाते बिहार के राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए विपक्षी एकजुटता पर भी सवाल खड़े किए।
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