Hafiz Saeed: पाकिस्तान में एक बार फिर अज्ञात हमलावरों ने अपनी मौजूदगी से दहशत फैला दी है। लाहौर में आतंकी हाफिज सईद के राइट हैंड और लश्कर-ए-तोयबा (Lashkar-e-Taiba) के संस्थापक सदस्य और आतंकी अमीर हमजा (Amir Hamza) पर जानलेवा हमला हुआ है। एक न्यूज़ चैनल के बाहर अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर ताबड़तोड़ गोलियां मारकर फरार हो गए। अमीर हमजा की हालत फिलहाल नाजुक है और वह अस्पताल में भर्ती है।
हमजा आतंकी हाफिज सईद का बेहद करीबी रहा है। भारत में हुए कई बड़े आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड भी रहा है। जिस वक्त ये हमला हुआ आमिर हमजा के साथ पाकिस्तान के रिटायर्ड जज जस्टिस नजीर अहमद भी गाड़ी में थे। हालांकि, उन्हें कोई चोट नहीं आई है, वह सुरक्षित हैं।
हमलावरों ने जिस सफाई और सूझबूझ से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उसने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। सरेआम हुई इस गोलीबारी ने एक बार फिर उन चर्चाओं को हवा दे दी है कि क्या पड़ोसी मुल्क में छिपे बैठे आतंकियों का सफाई अभियान अपने अगले चरण में पहुंच चुका है? हमजा को संभलने तक का मौका नहीं मिला और अब वह अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।

अमेरिका ने घोषित कर रखा है ‘वैश्विक आतंकवादी’
अमीर हमजा को लश्कर-ए-तोयबा का रणनीतिक दिमाग माना जाता है। ये उन शुरुआती लोगों में से एक था, जिन्होंने हाफिज सईद के साथ मिलकर लश्कर की नींव रखी थी। इसे संगठन का मुख्य विचारक कहा जाता है, यानी वो शख्स जो आतंकियों को तैयार करने के लिए उनका ब्रेनवॉश करता था। इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि अमेरिका ने इसे ‘वैश्विक आतंकवादी’ घोषित कर रखा है।

पैसा जुटाना और नए लड़कों की भर्ती करना इसका काम
अमीर हमजा का काम सिर्फ बंदूक उठाना नहीं था, बल्कि वो लश्कर के लिए पैसा जुटाना, नए लड़कों की भर्ती करना और पकड़े गए आतंकियों को छुड़ाने के लिए सौदेबाजी करने में माहिर था। उसने लश्कर की मैगजीन का संपादन किया और जिहाद को बढ़ावा देने वाली किताबें भी लिखीं। जब 2018 में पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और लश्कर पर कार्रवाई हुई, तो इसने ‘जैश-ए-मनकाफा’ नाम का एक नया मुखौटा तैयार कर लिया ताकि कश्मीर में दहशतगर्दी जारी रख सके।
कई आतंकियों इसी तरह निपटाया गया
बता दें कि इसी साल 2026 की शुरुआत में लश्कर कमांडर बिलाल आरिफ सराफी को ठिकाने लगाया गया था। 2025 में झेलम में फैसल नदीम और सिंध में अबू सैफुल्लाह खालिद का भी यही हश्र हुआ था। यहां तक कि कंधार विमान अपहरण (IC-814) का गुनहगार जाहूर मिस्त्री भी कराची में सरेआम मार गिराया गया था। अमीर हमजा पर हुए इस हमले ने अब आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है।
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