असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वसरमा से पंगा लेना कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को भारी पड़ रहा है. तेलंगाना हाई कोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें बड़ा झटका लगा है. खेड़ा ने अपनी याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट से उन्हें दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के शीर्ष अदालत के आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई थी, जिसे खारिज कर दिया गया है. कोर्ट ने उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने के लिए कहा है. गौरतलब है कि खेड़ा की मुसीबत इसलिए भी ज्यादा बढ़ी हुई है क्योंकि गुवाहाटी हाई कोर्ट 21 अप्रैल तक छुट्टीपर है.
बड़ी मुसीबत में घिरे खेड़ा
बता दें कि, खेड़ा के पैरोकार वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने गुरुवार को इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का आग्रह करते हुए चीफ जस्टिस की कोर्ट में उल्लेख किया था. पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी गिरफ्तारी पर लगा स्थगन आदेश नहीं हटाने का अनुरोध किया था. खेड़ा का कहना था कि गुवाहाटी हाई कोर्ट 21 तारीख तक छुट्टी पर है. तब तक स्टे ऑर्डर नहीं हटाया जाए, क्योंकि वो राहत के लिए अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग नहीं कर पाएंगे.
कांग्रेस नेता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर लगा स्टे हटाने का आदेश एकपक्षीय पारित किया था. कोर्ट ने उनकी बात नहीं सुनी. आज जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने खेड़ा की याचिका पर सुनवाई की है.
मामला क्या है?
यह मामला असम सरकार की ओर से पवन खेड़ा पर दर्ज किया गया है. पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर आरोप लगाए थे. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया था कि हिमंता की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जिनका उल्लेख मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया. वहीं मामले में पलटवार करते हुए भुइयां ने पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. इस मामले में पूछताछ के लिए असम पुलिस की एक टीम पहले खेड़ा के दिल्ली स्थित घर भी गई थी.
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