Bihar News: लोकसभा में आज शुक्रवार 17 अप्रैल महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) और परिसीमन विधेयक पर चर्चा के दौरान जदयू सांसद और पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने बिहार की राजनीति का उदाहरण देते हुए अपने संबोधन में कहा कि, 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 2006 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था।

लालू का जिक्र कर अखिलेश को चेताया

इस दौरान ललन सिंह ने यह दावा किया कि उस समय लालू यादव ने इस फैसले का विरोध किया था, जिसका लंबे समय तक उन्हें राजनीतिक असर देखने को मिला। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर सपा प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को भी सावधान रहने की सलाह दी।

पीएम मोदी की तारीफ

ललन सिंह ने कहा कि, पीएम मोदी का विजन “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” रहा है और महिला आरक्षण से जुड़े ये विधेयक इसी सोच के तहत लाए गए हैं। उन्होंने महिला आरक्षण बिल का जिक्र करते हुए कहा कि, देश की 50 प्रतिशत महिला आबादी को कानून निर्माण की प्रक्रिया में उचित भागीदारी देने के लिए यह कदम जरूरी है।

सरकार की मंशा गलत नहीं

जदयू सांसद ने आगे कहा कि, पंचायत स्तर पर पहले 33 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे कई राज्यों में बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक किया गया है। ऐसे में अब संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह पहल की जा रही है। उन्होंने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि, सरकार की मंशा पहले ही स्पष्ट थी और अब उसे लागू करने की दिशा में यह संशोधन विधेयक लाया गया है।

परिसीमन विधेयक पर कही ये बात

परिसीमन आयोग 2026 विधेयक पर बोलते हुए ललन सिंह ने कहा कि, इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है। उनके अनुसार, सीटों की संख्या बढ़ने से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और आसान हो जाएगा। उन्होंने इस प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

कांग्रेस पर भी साधा निशाना

चर्चा के दौरान जदयू सांसद ललन सिंह ने कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब सामाजिक बदलाव की बात होती है, तो विपक्षी दल अक्सर उसका विरोध करने लगते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कांग्रेस उसमें शामिल ही नहीं हुई। ललन सिंह ने साफ कहा कि महिला आरक्षण को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताना ठीक नहीं है, क्योंकि इसकी तैयारी 2023 से चल रही थी और पूरी प्रक्रिया के बाद ही इसे सदन में लाया गया है।

विरोध करने वालों को होगा राजनीतिक नुकसान

अंत में जदयू सांसद ने जोर देते हुए कहा कि अगर देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में सही प्रतिनिधित्व मिलेगा, तो लोकतंत्र और मजबूत होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि महिलाएं इस पहल के साथ खड़ी होंगी, और जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, उन्हें आने वाले समय में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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