गृह मंत्री अमित शाह अब महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. अमित शाह ने कहा कि बोलने के समय सबने कहा कि हम पक्ष में हैं. इंडी अलायंस के सदस्यों ने अगर-मगर, किंतु-परंतु करके महिला आरक्षण का विरोध किया है. मुझे लगा कि इम्प्लीमेंटेशन के तरीके का विरोध हो है, लेकिन नहीं. केवल और केवल महिला आरक्षण का विरोध है. ये तरीकों का नहीं, बिल का विरोध है. बिल का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है. किसी किसी संसदीय क्षेत्र में 39 लाख वोटर हैं.
संविधान में इसका अधिकार सरकार के पास है. जो सीटें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं, वह ये ध्यान में रखें कि एससी-एसटी की सीटें बढ़ाने का भी विरोध कर रहे हैं. संविधान में परिसीमन का प्रावधान है. शाह ने कहा कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण पर होगा.
इस बहस से तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है, जिसमें विपक्ष ने ओबीसी के प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई और बिल का विरोध करने का ऐलान किया है. सरकार प्रस्तावित बदलावों का बचाव कर रही है और दिन में बाद में वोटिंग होने की उम्मीद है. गृह मंत्री ने बहस पर जवाब देते हुए कहा कि बहस में 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया. इस चर्चा को बारीकी से कोई शब्दों में सुनेगा.
व्यक्ति की जनगणना में जाति पूछी जाती है
कोविड खत्म होने के बाद देश को काफी समय लगा उबरने में और जब 2024 में जनगणना शुरू हुई तो कुछ पार्टियों ने कहा कि जाति के आधार पर जनगणना होनी चाहिए. सरकार ने बाद में फैसला किया कि हम जाति जनगणना कराएंगे. 2025 में फैसले के बाद जो जनगणना हो रही है, उसमें जाति की जनगणना भी होगी, ये तय है. जब बिल्डिंग की गिनती होती है तो जाति नहीं पूछते. जब व्यक्ति की जनगणना होती है तो पूछा जाता है कि जाति क्या है, इसमें कोई संशय नहीं होनी चाहिए.
शाह बोले- हम हर राज्य की सीटें 50 फीसदी बढ़ा रहे हैं
शाह ने कहा- परीसीमन आयोग एक तरह से संवैधानिक अधिकार है. हर वोटर को अपना प्रतिनिधि समान रूप से पाने का अधिकार है. तमिलनाडु में 39 सीटें है. अगर 2011 की जनगणना के आधार पर करते हैं तो तमिलनाडु की सीटें 6 कम हो जाएंगी. लेकिन हम हर राज्य की सीटें 50 फीसदी बढ़ा रहे हैं. कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई. सबको मालूम है कि 21 में जनगणना होनी थी, लेकिम कोविड संकट आया और उसके कारण जनगणना नहीं हो पाई.
2029 का चुनाव नारी शक्ति से कराने के लिए यह जरूरी
शाह ने कहा- 50 सालों तक 1976 से 2026 तक, देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधि नहीं मिला. 26 में सीमा खत्म के बाद परिसीमन करेंगे तो 2029 से पहले खत्म नहीं होगा और 2027 तक जनगणना के आंकड़े नहीं आ सकते. अगर हम 2029 का चुनाव नारी शक्ति के स्पिरिट से कराना चाहते हैं तो अभी लाना पड़ेगा. मुझे लगता है विपक्ष समझे हुए हैं. 76 में 56.79 करोड़ आबादी थी. आज 140 करोड़ है. तब जितने सांसद थे, विपक्ष अब भी उतने ही सांसद रखना चाहता है.
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