Rajasthan Politics: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक बार फिर अपने पुराने आक्रामक अंदाज में नजर आ रहे हैं। रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे बड़ा जुबानी हमला बोला है। गहलोत ने साफ तौर पर कहा कि प्रधानमंत्री जिस भाषा का इस्तेमाल विपक्ष के लिए कर रहे हैं, वैसी भाषा आज तक भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने नहीं बोली।

बंगाल और तमिलनाडु में आग लगाने की कोशिश

बता दें कि गहलोत ने प्रधानमंत्री के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने बंगाल और तमिलनाडु की महिलाओं को भड़काने का काम किया है। गौरतलब है कि इन राज्यों में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है और गहलोत के अनुसार, पीएम ने विशेष सत्र की टाइमिंग भी विपक्षी नेताओं (राहुल गांधी और खड़गे) के सुझाव के खिलाफ जाकर सिर्फ चुनावी फायदे के लिए चुनी।

महिला आरक्षण बिल के पीछे का षड्यंत्र

दरअसल, गहलोत ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण बिल सिर्फ एक मुखौटा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार चाहती है कि चीन और रूस की तरह यहां भी विपक्ष को खत्म कर दिया जाए। चुनाव आयोग और न्यायपालिका जैसी संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं। परिसीमन के नाम पर असम की तरह पूरे देश में खेल करने की तैयारी है, ताकि भाजपा कभी चुनाव न हारे।

हॉर्स ट्रेडिंग और एजेंसियों का खेल

गहलोत ने अमित शाह और पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इनका एक ही एजेंडा है करोड़ों खर्च करो और सरकारें गिराओ। उन्होंने मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि राजस्थान में भी यही कोशिश हुई थी। गहलोत ने ईडी (ED) पर भी चुटकी लेते हुए कहा कि 50 करोड़ का छापा पड़ता है और ऊपर से फोन आते ही फाइल बंद कर दी जाती है।

राजीव गांधी का नाम न लेने पर जताई नाराजगी

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण की नींव राजीव गांधी ने पंचायत राज में रखी थी। सोनिया गांधी ने इसे आगे बढ़ाया। गहलोत के मुताबिक, अगर पीएम की नीयत साफ होती, तो वो राजीव गांधी का नाम लेते और सर्वदलीय बैठक बुलाते। लेकिन उनका सपना सिर्फ कांग्रेस मुक्त और विपक्ष मुक्त भारत का है, जिसमें वे कभी सफल नहीं होंगे।

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