पटना। ​आजादी की लड़ाई के दौर को याद करते हुए कांग्रेस अब उन्हीं तरीकों को अपना रही है जिनसे महात्मा गांधी ने जन-जन को जोड़ा था। सदाकत आश्रम में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में कार्यकर्ताओं को बताया जा रहा है कि कैसे रचनात्मक कार्यों के जरिए जनता के बीच पैठ बनाई जा सकती है। पार्टी का मानना है कि ‘गांधीगीरी’ के जरिए प्रखंड स्तर तक के कार्यकर्ताओं को मानसिक और वैचारिक रूप से मजबूत किया जा सकता है।

​महिला सशक्तिकरण पर जोर

​मुख्य प्रशिक्षक सुनीत शर्मा ने चरखे की प्रासंगिकता को आधुनिक ‘पैसिव इनकम’ से जोड़कर पेश किया है। उनके अनुसार, गांव की महिलाएं खाली समय में सूत कातकर या हथकरघा के माध्यम से वस्त्र बनाकर परिवार की आय बढ़ा सकती हैं। प्रशिक्षण के दौरान ऐसी महिलाओं को सम्मानित भी किया गया जो चरखे के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रही हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पार्टी का जुड़ाव भी बढ़ेगा।

​पुराने वोट बैंक को साधने की बड़ी कवायद

​बिहार में लगातार मिल रही राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए कांग्रेस अपने पुराने आधार सवर्ण, दलित और मुस्लिम को वापस लाने की कोशिश में है। पार्टी दलितों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विशेष अभियान चलाएगी। महात्मा गांधी के सामाजिक सद्भाव के मॉडल को अपनाते हुए कार्यकर्ता आने वाले दिनों में पदयात्राएं और सामाजिक गोष्ठियां करते नजर आएंगे।

​मनरेगा और बुनियादी अधिकारों की निगरानी

​पार्टी ने तय किया है कि वह मनमोहन सिंह सरकार के दौर की फ्लैगशिप योजनाओं (मनरेगा, RTI, RTE) की जमीनी स्तर पर निगरानी करेगी। पूर्व आईपीएस अधिकारी और प्रशिक्षण प्रभारी करुणा सागर के नेतृत्व में कार्यकर्ता इन अधिकारों को लागू कराने के लिए जनता के साथ मिलकर संघर्ष करेंगे। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के आदर्शों से लैस कर उन्हें धरातल पर सक्रिय करना है।