सोहराब आलम/मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी का बड़ा परिणाम देखने को मिला है। मोतिहारी पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध एक निर्णायक प्रहार करते हुए 102 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा जब्त किया है। यह कार्रवाई पुलिस की कार्यकुशलता और सटीक खुफिया तंत्र का प्रमाण है, जिसने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सक्रिय ड्रग
सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।

​संयुक्त टीम की घेराबंदी और छापेमारी

​पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप नेपाल से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए घोड़ासहन, जितना और झरौखर थाना की पुलिस ने एक संयुक्त विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जितना थाना क्षेत्र के अगरवा-रेगनिया के बीच स्थित एक नवनिर्मित मंदिर के पास घेराबंदी की।

​पुवाल की आड़ में छिपी थी तस्करी की खेप

​तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। बरामद किया गया गांजा खुले में रखने के बजाय खेत में रखे पुवाल (पराली/भूसा) के बड़े ढेर के भीतर छिपाकर रखा गया था। प्रारंभिक दृष्टि में यह सामान्य कृषि अवशेष प्रतीत हो रहा था, लेकिन जब पुलिस टीम ने गहन तलाशी ली, तो पुवाल के नीचे से गांजे के पैकेट निकलने लगे। तौल करने पर कुल वजन 102 किलोग्राम पाया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों में आंकी जा रही है।

​नेटवर्क का खुलासा और पुलिस की दबिश

​पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस खेप को सीमा पार से लाकर स्थानीय और अंतरराज्यीय बाजारों में खपाने की योजना थी। हालांकि, पुलिस की छापेमारी से पहले ही तस्कर मौके से फरार होने में सफल रहे, लेकिन पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर कई मुख्य तस्करों की पहचान कर ली है। वर्तमान में पुलिस की विशेष टीमें चिन्हित ठिकानों पर सघन छापेमारी कर रही हैं।
​अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर गश्त बढ़ा दी गई है और इस नेटवर्क से जुड़े हर सफेदपोश या अपराधी को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस सफल ऑपरेशन ने सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अपराधियों के बीच दहशत पैदा कर दी है।