आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है . जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को सुनवाई से अलग करने की केजरीवाल की मांग को खारिज कर दिया है . इससे पहले दोपहर में हुई सुनवाई में केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी दलीलें रखीं थी . हालांकि, कोर्ट ने उनका जवाबी हलफनामा स्वीकार नहीं किया था . बता दें केजरीवाल की ओर से दायर याचिका में जस्टिस शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें केस से अलग होने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया.

फैसला सुनाते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा भावुक और सख्त नजर आईं. उन्होंने दो-टूक कहा कि उनकी न्यायिक गरिमा और ईमानदारी को दी गई यह चुनौती न केवल अनुचित है बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रहार है. अब इस हाई-प्रोफाइल ‘शराब घोटाले’ की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता ही जारी रखेंगी.

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली की निचली अदालत ने 27 फरवरी को शराब नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी किया था और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अधिकारी को फटकार लगाई थी . CBI ने आदेश को चुनौती दी थी, जिसकी सुनवाई जस्टिस शर्मा ने की . उन्होंने 9 मार्च को निचली अदालत के CBI अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के आदेश पर रोक लगा दी . उसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को मामले से अलग करने की याचिका दायर की थी .

केजरीवाल ने क्या दिए तर्क?

इस मामले में केजरीवाल ने खुद अपनी पैरवी की थी . उन्होंने जस्टिस शर्मा को मामले से अलग करने के संबंध में तर्क दिया कि निचली अदालत का एक विस्तृत आदेश 40,000 दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आया था, लेकिन उसे 5 मिनट में ही पलट दिया गया . उन्होंने ‘रणजीत ठाकुर बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पूर्वाग्रह की आशंका ही न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए पर्याप्त आधार है .

केजरीवाल ने मामले को बताया था राजनीतिक

केजरीवाल ने मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस शर्मा पर आरोप लगाया था कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं . RSS भाजपा का वैचारिक जनक है और भाजपा, AAP का प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और केंद्र में सत्तारूढ़ दल है . ऐसे में यह मामला पूरी तरह राजनीतिक है . जस्टिस शर्मा का 4 बार वहां जाना आशंका पैदा करता है . ऐसे में क्या उन्हें उचित न्याय मिल पाएगा .

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m