चंडीगढ़। पंजाब में अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करने वालों के खिलाफ सरकार ने अत्यंत सख्त रुख अपना लिया है। राज्य में जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026 को आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है। राज्यपाल द्वारा इस बिल को मंजूरी मिलने के बाद, अब बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद की सजा अनिवार्य कर दी गई है। पंजाब भवन में कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इसे धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता और राज्य में फिरकूप्रस्त सौहार्द बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक व निर्णायक कदम बताया।

पिछली सरकारों पर तीखे हमले

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पिछली अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकारों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान बेअदबी की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं एक चलन बन गई थीं। उन्होंने 1986 के नकोदर कांड और 2015 की बरगाड़ी व बहबल कलां की घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने अफसोस जताया कि पिछली सरकारें इंसाफ दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहीं। उन्होंने कहा कि उस दौरान ढेरों आयोग और विशेष जांच टीमें (SITs) तो बनीं, लेकिन एक्शन टेकन रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दी गईं और जांच रिपोर्टें धूल फांकती रहीं, जिसके कारण असली अपराधी और साजिशकर्ता कानून की पकड़ से बाहर रहे।

2022 के बाद जांच में आई तेजी

कैबिनेट मंत्री ने दावा किया कि 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद दशकों से अटकी जांचों में तेजी लाई गई है। उन्होंने बताया कि यह पहली बार है जब राजनीतिक संरक्षण प्राप्त उच्च-प्रोफाइल हस्तियों को भी अदालतों से अग्रिम जमानत लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने दोहराया कि अपराधी चाहे किसी भी सामाजिक या राजनीतिक रसूख का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। नए कानून के प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए मंत्री चीमा ने बताया कि इसे काफी व्यापक बनाया गया है ताकि कोई भी दोषी कानूनी खामियों का फायदा न उठा सके।

वादा पूरा होने का दावा

अंत में, हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह कड़ा कानून मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा पंजाब की जनता से किए गए वादे की पूर्ति है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कानून पंजाब की शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों के लिए एक कड़ा संदेश है कि अब उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।