जगदलपुर। महतारी वंदन योजना का लाभ ले रही महिलाओं के सामने अब तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य होते ही हजारों महिलाएं दफ्तरों के चक्कर काटने मजबूर हैं। सर्वर की सुस्ती और नाम मिसमैच ने भुगतान प्रक्रिया अटका दी है। करीब 1.73 लाख हितग्राहियों में लगभग 2 हजार मामलों में डेटा गड़बड़ी सामने आई है।
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दो साल पहले आवेदन के दौरान हुई गलत एंट्री अब परेशानी बन गई है। भीषण गर्मी में महिलाएं महिला एवं बाल विकास कार्यालय पहुंच रही हैं। कई जगह आंगनबाड़ी स्तर पर सुधार के बजाय सीधे दफ्तर भेजा जा रहा है। राज्य स्तर पर डेटा सुधार में 5 से 7 दिन का समय बताया जा रहा है। 30 जून तक समय सीमा तय होने से महिलाओं की चिंता और बढ़ गई है। विभाग ने साफ किया है कि ई-केवाईसी पूरी तरह निशुल्क है। रुपयों की मांग करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अब सवाल यही है कि योजना राहत बनेगी या तकनीकी बोझ?

बिजली बनकर टूटा कहर, 9 मवेशियों की मौत
बीजापुर। भैरमगढ़ ब्लॉक के उसपरी गांव में कुदरत का कहर टूट पड़ा। तेज आंधी, बारिश और आकाशीय बिजली ने 9 मवेशियों की जान ले ली। बारिश से बचने के लिए मवेशी महुआ पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान बिजली सीधे पेड़ पर गिर गई। मौके पर ही गाय-बैलों की दर्दनाक मौत हो गई।
सबसे ज्यादा नुकसान लच्छू माड़वी को हुआ, जिनके 5 मवेशी मरे। दसूराम ओयम और विक्रम जायसवाल के 2-2 पशु भी काल के गाल में समा गए। ग्रामीण परिवारों के लिए पशुधन ही सबसे बड़ी पूंजी माना जाता है। इस हादसे से तीन परिवारों की आर्थिक कमर टूट गई है। राजस्व विभाग ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा शुरू किया है। पीड़ित परिवारों ने मुआवजे की मांग की है। प्रशासन ने खराब मौसम में पेड़ों के नीचे न रुकने की अपील की है।
बिना सुविधा वसूली से कोसारटेडा में नाराजगी
जगदलपुर। कोसारटेडा जलाशय में पर्यटकों की भीड़ तो पहुंच रही है, लेकिन सुविधाएं नदारद हैं। इसके बावजूद प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे लोग नाराज हैं। पर्यटकों का कहना है कि यहां केवल पानी देखने के अलावा कुछ नहीं है।
जलाशय में मनोरंजन के लिए आने वाले पर्यटकों के बैठने, घूमने, मनोरंजन या गतिविधियों की व्यवस्था नहीं है। नौकायन जैसी सुविधा होती तो लोग समय बिता सकते थे। लोग मायूस होकर कुछ ही देर में लौट जा रहे हैं। जलाशय किनारे पुराने पार्क को हटाकर नया निर्माण किया जा रहा है। उसी क्षेत्र में रिसॉर्ट निर्माण भी जारी है। करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोग पहले मूलभूत सुविधाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुविधा मिले तो शुल्क भी उचित लगेगा। फिलहाल, पर्यटन स्थल पर व्यवस्था से ज्यादा अव्यवस्था नजर आ रही है।
जवान बने जीवनरक्षक, गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल
दंतेवाड़ा। नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों ने मानवता की मिसाल पेश की है। दंतेवाड़ा के सालेपाल गांव में गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी। इलाके में एंबुलेंस सुविधा समय पर नहीं मिल सकी। सूचना मिलते ही सीआरपीएफ जवान मौके पर पहुंचे। महिला को सुरक्षित वाहन में बैठाकर बारसूर अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर इलाज मिलने से स्थिति संभल गई।
चिकित्सकों ने बताया कि प्रसव मामलों में हर मिनट अहम होता है। जवान भर्ती होने तक अस्पताल में साथ रहे। परिजनों ने नम आंखों से जवानों का आभार जताया। ग्रामीणों ने कहा सुरक्षा बल भरोसे का चेहरा बन रहे हैं। स्वास्थ्य और मदद के मोर्चे पर भी जवान साथ खड़े हैं। इस पहल ने जनता और सुरक्षा बलों का रिश्ता और मजबूत किया है।
केशकाल पुलिस ने राजस्थान के तस्कर को दबोचा
कोंडागांव । केशकाल पुलिस ने नशे के कारोबार पर बड़ा वार किया है। 115 किलो से ज्यादा गांजा लेकर जा रहे दो आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपी राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी बताए गए हैं। सूचना मिली थी कि महिंद्रा कार से उड़ीसा से रायपुर की ओर खेप जा रही है। थाना के सामने नाकाबंदी कर वाहन को रोका गया।
तलाशी में डिक्की से 53 पैकेट गांजा बरामद हुआ। बरामद गांजे की कीमत 11 लाख 52 हजार रुपये आंकी गई है। कार की कीमत करीब 18 लाख रुपये बताई गई है। कुल जब्ती लगभग 29 लाख 52 हजार रुपये की हुई। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा गया। अभियान लगातार अवैध गांजा और शराब तस्करी के खिलाफ चल रहा है। पुलिस ने साफ किया है कि नशे के कारोबारियों पर शिकंजा जारी रहेगा।
करोड़ों की फ्लड लाइट बंद, अंधेरे में चित्रकोट की चमक
जगदलपुर। चित्रकोट जलप्रपात की रातें अब भी अंधेरे में डूबी हुई हैं। करीब एक करोड़ रुपये से लगी फ्लड लाइट तीन साल बाद भी नहीं जली। हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं। लेकिन शाम ढलते ही क्षेत्र सुनसान हो जाता है। दूर-दराज से पहुंचे सैलानी रात का नजारा नहीं देख पाते।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि लाइट चालू हो तो पर्यटन बढ़ेगा। रात 10 बजे तक लोग जलप्रपात का आनंद ले सकेंगे। बताया जा रहा है कि भारी बिजली बिल के डर से संचालन अटका है। देखरेख की जिम्मेदारी भी अब तक तय नहीं हो सकी है। कुछ लोगों ने पार्किंग और न्यूनतम शुल्क से खर्च निकालने का सुझाव दिया है। स्थानीय युवाओं की समिति बनाकर संचालन की मांग उठी है। अब करोड़ों की योजना रोशनी देगी या फाइलों में रहेगी, नजरें इसी पर हैं।
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