लक्ष्य वर्मा, करनाल: हिमाचल के सेब का स्वाद तो आपने खूब लिया होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो सेब ठंडे पहाड़ी इलाकों में उगते हैं, उन्हें हरियाणा की धरती पर भी उगाया जा सकता है? करनाल के एक प्रगतिशील किसान नरेंद्र सिंह चौहान ने यह कर दिखाया है। उन्होंने न केवल सेब की खेती को हरियाणा में संभव बनाया, बल्कि गुरबंदी, खुबानी और सैकड़ों प्रकार के विदेशी फलों और सब्जियों की पौध तैयार कर एक मिसाल पेश की है। आज उनकी इस मेहनत की चर्चा पूरे देश में है।

सोशल मीडिया से लाखों किसान जुड़े

नरेंद्र सिंह अब न केवल खुद खेती कर रहे हैं, बल्कि किसानों को पौधे उपलब्ध कराकर उनकी आय दोगुनी करने में भी मदद कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वे लाखों किसानों से जुड़े हुए हैं और उन्हें आधुनिक व उन्नत खेती के खास तरीके सिखा रहे हैं।

शुरुआत में चुनौतीपूर्ण था काम

नरेंद्र सिंह और उनके बेटे का कहना है कि शुरुआत में यह काम चुनौतीपूर्ण था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण उन्होंने हार नहीं मानी। नरेंद्र बताते हैं कि जब उन्होंने पंजाब के होशियारपुर में सेब की फसल देखी, तो उन्हें विश्वास हुआ कि यदि वहां सेब हो सकता है, तो हरियाणा की मिट्टी में भी यह संभव है। बस फिर क्या था, वे हिमाचल गए और वहां से सेब की उन्नत किस्म के पौधे लेकर आए।

पौधों को नर्सरी में किया तैयार

शुरुआत में उन्होंने इन पौधों को अपनी नर्सरी में वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया। पहले ही साल में जब फल आने शुरू हुए, तो लोग हैरान रह गए। नरेंद्र सिंह बताते हैं कि सेब का पौधा तीसरे साल तक पूरी तरह फल देने लगता है। आज उनके पास लगे सेब के पौधे, जो शुरुआत में मात्र आठ इंच के थे, अब छह फीट से भी अधिक ऊंचे हो चुके हैं और उन पर बंपर फल लग रहे हैं।

आम, अमरूद, आडू और कई विदेशी फलों की किस्में मौजूद

उनकी नर्सरी में आज आम, अमरूद, आडू और कई विदेशी फलों के साथ-साथ ऑर्गेनिक सब्जियों की सैकड़ों किस्में मौजूद हैं। आसपास के लोग और अन्य किसान जब उनकी नर्सरी देखने आते हैं, तो वे दंग रह जाते हैं। नरेंद्र सिंह का उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं है, बल्कि पूरे भारत के किसानों तक अच्छी गुणवत्ता वाली पौध पहुँचाना और उन्हें जागरूक करना है। वे सोशल मीडिया के जरिए किसानों को यह बता रहे हैं कि कैसे पारंपरिक खेती से हटकर फलों और सब्जियों की आधुनिक खेती करके वे अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं।