Rajasthan News: मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम श्रीसांवलिया सेठ के दरबार में इन दिनों आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि दान के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं। बता दें कि इस माह के भंडार की गिनती ने प्रशासन को भी हैरान कर दिया है। महज 5 चरणों की गिनती में ही दानराशि साढ़े 32 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है और सबसे बड़ी बात यह है कि नोटों की गिनती अभी भी जारी है।

सत्संग हॉल में नोटों का ढेर
दरअसल, 16 अप्रैल को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर विशेष भोग आरती के बाद मंदिर मंडल की सीईओ और अध्यक्ष की मौजूदगी में भंडार खोला गया था। तब से लेकर अब तक मंदिर के सत्संग हॉल में नोटों की गड्डियों का अंबार लगा हुआ है। सूत्रों ने बताया कि पहले ही चरण में 11 करोड़ से ज्यादा की रकम निकली थी, जिसने संकेत दे दिए थे कि इस बार कुछ बड़ा होने वाला है।
पांच चरणों की गिनती का ब्यौरा
- पहला चरण: 11 करोड़ 11 लाख रुपये।
- दूसरा चरण: 6 करोड़ 51 लाख 24 हजार रुपये।
- तीसरा चरण: 9 करोड़ 62 लाख 38 हजार रुपये।
- चौथा व पांचवा चरण: लगभग 5 करोड़ रुपये से अधिक।
- छठा चरण: आज गुरुवार को भी सत्संग हॉल में नोटों की गिनती का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
नोटों के साथ सोने-चांदी की बरसात
गौरतलब है कि भंडार से सिर्फ कागज के नोट ही नहीं, बल्कि भक्तों का ‘सोना’ भी निकल रहा है। बड़ी मात्रा में श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के गहने और बिस्किट अर्पित किए हैं। मंदिर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पहले बड़े नोट गिने जा रहे हैं, कीमती धातुओं को अलग सुरक्षित रखा गया है जिनका वजन आखिरी दिन किया जाएगा।
भक्त क्यों बनाते हैं भगवान को बिजनेस पार्टनर?
देश विदेश से बड़ी संख्या में व्यापारी सांवलिया सेठ के दर्शन करने पहुंचते हैं। यहां एक अनोखी परंपरा है- लोग सांवरा सेठ को अपने व्यापार में पार्टनर बनाते हैं। मुनाफे का एक हिस्सा भगवान के नाम निकालते हैं और काम सफल होने पर उसे चुपचाप भंडार में डाल देते हैं। यही वजह है कि यहां का खजाना कभी खाली नहीं होता।
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