पटना। बिहार की नीतीश-सम्राट सरकार ने राज्य के शहरी ढांचे को पूरी तरह बदलने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 22 अप्रैल को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर राज्य के 10 जिलों में 11 नए आधुनिक सेटेलाइट टाउनशिप बसाने की मंजूरी दी गई है। इन शहरों का नामकरण बिहार की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के आधार पर किया जाएगा, जिससे आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

​पटना में ‘पाटलिपुत्र’: 81 हजार एकड़ का महा-नगर

​इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे बड़ा केंद्र राजधानी पटना होगा। पटना के पुनपुन इलाके में लगभग 81,730 एकड़ भूमि पर ‘पाटलिपुत्र’ नाम का एक नया शहर बसाया जाएगा। इसमें पटना जिले के 9 प्रखंडों के 275 ग्रामीण क्षेत्र शामिल होंगे। इसका मुख्य केंद्र (कोर एरिया) 1010 एकड़ में फैला होगा। इस क्षेत्र में वर्तमान में जमीन की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है ताकि मास्टर प्लान के अनुसार निर्माण सुनिश्चित हो सके।

​नवी मुंबई और चंडीगढ़ जैसा होगा स्वरूप

​बिहार के ये नए शहर भारत की पहली प्लांड सिटी चंडीगढ़ और महाराष्ट्र के नवी मुंबई की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे। नवी मुंबई की तरह यहां भी चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित सेक्टर, पर्याप्त खुली जगह और बेहतर कनेक्टिविटी होगी। मास्टर प्लान के तहत कोर और स्पेशल एरिया निर्धारित किए जाएंगे, जहां रहने, बाजार, पार्क और हरियाली के लिए स्थान पहले से तय होंगे।

​प्रमुख सुविधाएं और बुनियादी ढांचा

​इन टाउनशिप्स में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:

  • ​कनेक्टिविटी: 6 लेन की सड़कें और आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव।
  • ​आर्थिक हब: फिनटेक सिटी, लॉजिस्टिक हब और आईटी सेक्टर का विकास।
  • ​संस्थान: स्पोर्ट्स सिटी और ज्यूडिशियल एकेडमी जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना।
  • ​पर्यावरण: सघन वृक्षारोपण और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम।

​नए शहरों से होने वाले बड़े फायदे

  • ​शहरी दबाव में कमी: पटना और मुजफ्फरपुर जैसे बड़े शहरों पर बढ़ती आबादी और संसाधनों का बोझ कम होगा।
  • ​आर्थिक प्रगति: नए निवेश के रास्ते खुलेंगे और रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
  • ​बेहतर जीवनशैली: नागरिकों को कम लागत में आधुनिक सुविधाएं और प्रदूषण मुक्त वातावरण मिलेगा।
  • ​सुनियोजित विकास: अनियंत्रित निर्माण की जगह अब नियमबद्ध कॉलोनियां बनेंगी।

​इन टाउनशिप्स के माध्यम से बिहार सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और पलायन रोकने की दिशा में काम कर रही है।