आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर संभाग में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में हल्की बारिश, गरज-चमक और कुछ इलाकों में वज्रपात यानी बिजली गिरने की आशंका जताई है।
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मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी वाली हवाएं और विदर्भ से तमिलनाडु तक बनी द्रोणिका का असर बस्तर पर दिख सकता है। 24 और 25 तारीख को बारिश कम रहने से तापमान थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन इसके बाद 26 अप्रैल से मौसम फिर सक्रिय होने से दोबारा गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

पिछली बारिश में 90 करोड़ का नुकसान
हालांकि, मौसम का यह बदलाव केवल राहत ही नहीं, चिंता भी लेकर आया है। पिछली बारिश में बस्तर का हरा सोना कहे जाने वाला तेंदूपत्ता भारी नुकसान झेल चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, बस्तर संभाग के चार जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से करीब 90 करोड़ रुपए तक नुकसान का अनुमान जताया गया था।
बारिश के कारण कई जगह तेंदूपत्ते भीग गए, काले पड़ गए और फटने लगे, जिससे बड़ी मात्रा में पत्ता खरीदी योग्य नहीं रहा। इसका सीधा असर संग्रहण लक्ष्य पर पड़ा और हजारों संग्राहकों की आय प्रभावित हुई।
तेंदूपत्ता बस्तर के आदिवासी परिवारों की सालाना नकद कमाई का बड़ा सहारा है। ऐसे में अगर मौसम फिर बिगड़ता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दोबारा असर पड़ सकता है। फिलहाल, मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, गरज-चमक के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और तेंदूपत्ता संग्रहण करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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