सोहराब आलम/मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से सामाजिक सद्भाव और त्वरित न्याय की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। जिले के तुरकौलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत माधोपुर मठ और शंकर सरैया गांव के पास ग्रामीणों ने एक प्रेमी जोड़े को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ने के बाद, पुलिसिया पचड़े में पड़ने के बजाय सामाजिक पहल के जरिए उनकी शादी करा दी।

​क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, शंकर सरैया गांव निवासी जोगिंदर महतो का पुत्र मिथुन कुमार अपनी प्रेमिका से मिलने पहुंचा था। इसी दौरान ग्रामीणों ने दोनों को एकांत में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई। युवाओं और ग्रामीणों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे कानून के हवाले करने के बजाय गांव की मर्यादा और दोनों परिवारों की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा।

​पंचायत की पहल और पंडित का साथ

​घटना के बाद तत्काल गांव में एक पंचायत बुलाई गई। पंचायत में दोनों पक्षों (लड़का और लड़की पक्ष) के अभिभावकों को आमंत्रित किया गया। ग्रामीणों और पंचायत के प्रबुद्ध जनों ने तर्क दिया कि यदि यह मामला थाने पहुंचता है, तो दोनों परिवारों की बदनामी होगी। आपसी विचार-विमर्श के बाद दोनों पक्ष शादी के लिए राजी हो गए।
​इसके बाद, माधोपुर मठ के प्रसिद्ध पंडित वीरेंद्र मिश्रा को बुलाया गया। उनकी उपस्थिति में और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच, माधोपुर मठ परिसर में ही विवाह की रस्में पूरी की गईं। मिथुन और उसकी प्रेमिका ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई और अग्नि के सात फेरे लेकर सात जन्मों के बंधन में बंध गए।

​सामाजिक प्रतिष्ठा और खुशहाल अंत

​शादी संपन्न होने के बाद नवविवाहित जोड़ा काफी खुश नजर आया। उन्होंने पंचायत के इस फैसले का सम्मान किया और बड़ों का आशीर्वाद लिया। ग्रामीणों का मानना है कि इस पहल से न केवल दो प्रेमियों को उनका हक मिला, बल्कि समाज में फैलने वाली कड़वाहट और मुकदमों के बोझ को भी टाला जा सका। इलाके में पंचायत के इस ‘स्पॉट फैसले’ और सकारात्मक सोच की काफी चर्चा हो रही है।