कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संबोधन ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। सदन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए सम्राट चौधरी ने ‘बपौती’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे अब कांग्रेस ने नीतीश कुमार के अपमान से जोड़ दिया है।
सत्ता किसी की बपौती नहीं: सम्राट चौधरी
बीते शुक्रवार को सदन में अपना पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सत्ता पर किसी का एकाधिकार नहीं है और यह किसी की ‘बपौती’ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी बिहार के 14 करोड़ जनता के आशीर्वाद का परिणाम है। सम्राट ने तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी पलटवार किया जिसमें उन्हें ‘लालू की पाठशाला’ का छात्र बताया गया था। उन्होंने कहा कि वे नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और अन्य सहयोगियों के सामूहिक समर्थन से इस पद पर आसीन हैं।
कांग्रेस का पलटवार: नीतीश कुमार का अपमान
सम्राट चौधरी के इस बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राठौर ने कहा कि मुख्यमंत्री इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर असल में नीतीश कुमार को अपमानित कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों में 10 बार मुख्यमंत्री रहे हैं, ऐसे में यह कहना कि यह पद किसी की बपौती नहीं है, सीधे तौर पर नीतीश के कार्यकाल पर सवाल उठाना है। कांग्रेस का आरोप है कि सम्राट चौधरी खुद को नीतीश कुमार से बेहतर दिखाने की होड़ में लगे हैं।
भ्रष्टाचार और निगरानी पर भी छिड़ी रार
सदन में सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि अब थानों और अंचलों की सीधी निगरानी मुख्यमंत्री आवास से होगी। इस पर कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अनजाने में यह स्वीकार कर लिया है कि नीतीश कुमार के शासन में थानों और अंचलों में भ्रष्टाचार चरम पर था। कांग्रेस के अनुसार, सम्राट चौधरी का यह कहना कि अब निगरानी बढ़ेगी, यह दर्शाता है कि अब तक मुख्यमंत्री की दृष्टि इन ब्लॉकों और थानों तक नहीं पहुंच पा रही थी, जिससे अपराध और भ्रष्टाचार फला-फूला।
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