किशनगंज। जिले से भू-माफियाओं के दुस्साहस का एक बड़ा मामला सामने आया है। दिघलबैंक प्रखंड के धनटोला पंचायत में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज अंजुम की करोड़ों की पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगा है। पीड़ित नेता का कहना है कि गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन इस मामले में सुस्त नजर आ रहा है।

​32 एकड़ से अधिक भूमि पर कब्जे का जाल

​पूर्व जिलाध्यक्ष फिरोज अंजुम के अनुसार, धनटोला पंचायत के मोहामारी क्षेत्र में उनकी कुल 32 एकड़ 87 डिसमिल पैतृक जमीन स्थित है। आरोप है कि स्थानीय दबंगों और कुछ ग्रामीणों ने इस निजी भूमि को ‘सरकारी जमीन’ बताकर उस पर अवैध रूप से अपना अधिकार जमा लिया है। अंजुम का दावा है कि यह पूरी कवायद एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है ताकि उनकी कीमती जमीन को हड़पा जा सके।

​मिट्टी माफिया और स्थानीय मिलीभगत का आरोप

​शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्तमान में लगभग 32 लोग उनकी जमीन पर अवैध रूप से बसे हुए हैं। इतना ही नहीं, जमीन पर कब्जा करने वाले लोग वहां से अवैध रूप से मिट्टी काटकर बेच रहे हैं, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है। फिरोज अंजुम ने सीधे तौर पर नेहरू इस्लाम समेत कई अन्य व्यक्तियों को इस अतिक्रमण का मुख्य सूत्रधार बताया है। उन्होंने स्थानीय पंचायत के मुखिया की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतना बड़ा कब्जा संभव नहीं है।

​प्रशासनिक फाइलों में दबी कार्रवाई

​मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू प्रशासनिक विफलता है। अंजुम ने खुलासा किया कि जमीन खाली कराने के लिए प्रखंड स्तर से पहले एक प्रस्ताव तैयार हुआ था, जिसमें 13 अतिक्रमणकारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज थे। इसके बावजूद, धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस और राजस्व विभाग के चक्कर काट रहे पूर्व जिलाध्यक्ष ने अब जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

​पुलिस का पक्ष

​इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए दिघलबैंक थाना पुलिस ने प्रतिक्रिया दी है। थाना पुलिस का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है और भूमि विवाद से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।