जननायक जनता पार्टी आज हिसार में छात्रों और किसानों के मुद्दों को लेकर महापंचायत कर रही है। यह आयोजन पार्टी के लिए संगठन को एकजुट करने और जनता के बीच दोबारा विश्वास बहाली का एक बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा की सियासत में आज 27 अप्रैल का दिन जननायक जनता पार्टी (JJP) के भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक माना जा रहा है। हिसार के ऐतिहासिक क्रांतिमान पार्क में आयोजित होने वाली इस महापंचायत का आधिकारिक एजेंडा गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (GJU) से जुड़े छात्र हितों की रक्षा करना है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे JJP के संगठन को पुनर्जीवित करने और पिछले कुछ समय में आधार खो चुके जनाधार को दोबारा समेटने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का लक्ष्य इस मंच के जरिए युवाओं और किसानों को यह संदेश देना है कि वे अब भी उनके हितों के सबसे बड़े पैरोकार हैं।
विश्वास बहाली की चुनौती: किसान और खाप पंचायतों का रुख
JJP के लिए यह महापंचायत किसी बड़ी ‘सियासी परीक्षा’ से कम नहीं है, क्योंकि पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती “विश्वास बहाली” की है। भाजपा के साथ गठबंधन सरकार के दौरान किसान आंदोलन को लेकर उपजी नाराजगी अभी भी ग्रामीण इलाकों में महसूस की जा रही है। हालांकि पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि इस मंच पर नरेश टिकैत जैसे बड़े किसान नेता और विभिन्न खाप पंचायतों का समर्थन मिलेगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार कई जमीनी नेता अब भी दूरी बनाए हुए हैं। उन्हें डर है कि JJP के मंच पर खुलकर आने से उनकी साख पर असर पड़ सकता है। ऐसे में महापंचायत में जुटने वाली भीड़ और मंच साझा करने वाले चेहरे यह तय करेंगे कि क्या JJP जनता का भरोसा दोबारा जीतने में सफल हुई है।
भविष्य की दिशा: वापसी या राजनीतिक संकट?
विपक्षी दलों की नजरें भी इस आयोजन पर टिकी हैं, जो इसे JJP की “अस्तित्व बचाने की आखिरी कोशिश” के रूप में देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि महापंचायत में भारी जनसमर्थन जुटता है, तो यह हरियाणा की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है और JJP को एक बार फिर मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा कर सकता है। लेकिन, अगर प्रमुख चेहरे और अपेक्षित भीड़ नदारद रही, तो यह पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा। कुल मिलाकर, हिसार की यह महापंचायत सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2026 के आगामी राजनीतिक समीकरणों का स्पष्ट संकेत देने वाला मंच है।

