कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हिसार में हुई हिसार छात्र महापंचायत अब सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं रही, बल्कि इसने जननायक जनता पार्टी (JJP) के राजनीतिक भविष्य पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस महापंचायत को JJP के लिए “शक्ति प्रदर्शन” (Power Show – ताकत दिखाने का मंच) माना जा रहा था, वही मंच पार्टी की सीमित पकड़ को उजागर करता नजर आया।

सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत यह रहा कि जिन बड़े किसान चेहरों—राकेश टिकैत और नरेश टिकैत—की मौजूदगी से मंच को राष्ट्रीय वजन मिल सकता था, वे नहीं पहुंचे। वहीं परिवारिक एकजुटता का संदेश देने के लिए दुष्यंत चौटाला और अभय चौटाला का एक मंच पर आना भी संभव नहीं हो पाया।

यानी JJP जिस “बड़ी तस्वीर” (Grand Narrative – बड़ा राजनीतिक संदेश) बनाना चाहती थी, वह जमीन पर नहीं उतर सकी।

भीड़ जरूर आई, लेकिन वह पूरी तरह JJP के झंडे तले संगठित दिखी—क्रॉस-पॉलिटिकल (Cross Political – विभिन्न दलों का साझा समर्थन) या व्यापक किसान-छात्र एकजुटता का वह प्रभाव नहीं बन पाया, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

यही कारण है कि यह महापंचायत “मोमेंटम क्रिएशन” (Momentum Creation – लहर बनाने) के बजाय “लिमिटेड मोबिलाइजेशन” (Limited Mobilization – सीमित समर्थन) का संकेत दे गई।

राजनीतिक मायनों में देखें तो JJP के लिए यह इवेंट एक “मौका” था—गठबंधन से अलग अपनी जमीन मजबूत दिखाने का। लेकिन बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी और परिवारिक एकता का अभाव यह दर्शाता है कि पार्टी अभी भी “आइसोलेशन फेज” (Isolation Phase – अलग-थलग स्थिति) से बाहर नहीं निकल पाई है।

क्या निकले बड़े निष्कर्ष?
हिसार की इस महापंचायत ने तीन स्पष्ट संकेत दिए—पहला, JJP का जनाधार अभी सीमित दायरे में सिमटा है; दूसरा, बड़े किसान नेतृत्व का खुला समर्थन नहीं मिलना पार्टी की रणनीति पर सवाल है; और तीसरा, चौटाला परिवार की एकजुटता के बिना बड़ा राजनीतिक संदेश देना मुश्किल बना रहेगा।

Bottom Line (निचोड़):
यह महापंचायत JJP के लिए “गेम चेंजर” (Game Changer – स्थिति बदलने वाला मोड़) नहीं बन पाई, बल्कि यह दिखा गई कि 2026-27 की राजनीति में पार्टी को अपनी जमीन और गठजोड़ दोनों पर फिर से गंभीर काम करना होगा।