आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में विलय को लेकर राज्यसभा के सभापति ने इस विलय को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद संसद की सियासत में हलचल तेज हो गई है। विलय के तहत राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी अब बीजेपी संसदीय दल का हिस्सा बन गए हैं। इस फैसले के बाद CM रेखा गुप्ता की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इन सांसदों के शामिल होने से बीजेपी संसदीय दल और मजबूत होगा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बताया।

आप सभी का यह निर्णय अभिनंदनीय

सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “माननीय राज्यसभा सभापति श्री सी.पी. राधाकृष्णन जी द्वारा आम आदमी पार्टी के 7 सांसदों के भाजपा में विलय की आधिकारिक स्वीकृति का हम हार्दिक स्वागत करते हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित होकर लिया गया आप सभी का यह निर्णय अभिनंदनीय है।”

अपने पोस्ट में आगे उन्होंने कहा, “संसदीय गरिमा और अनुशासन को बनाए रखने वाले इन साथियों का अनुभव देश के विकास को नई शक्ति प्रदान करेगा। झूठ और अराजक राजनीति को त्याग कर राष्ट्र सर्वोपरि की भावना के साथ जुड़ने के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।”

राज्यसभा में घटी AAP सांसदों की संख्या

बता दें कि सोमवार (27 अप्रैल) को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आम आदमी पार्टी की ताकत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां पार्टी के कुल 10 सांसद थे, वहीं अब यह संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है।

विलय को मंजूरी मिलने पर AAP की प्रतिक्रिया

राज्यसभा में सांसदों के कथित विलय को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। संजय सिंह ने सभापति के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे “एकतरफा” करार दिया है। उन्होंने कहा कि सात सांसदों द्वारा दिए गए विलय प्रस्ताव पर तो संज्ञान लिया गया, लेकिन उनके द्वारा भेजे गए पत्र पर अभी विचार नहीं किया गया है। संजय सिंह ने कहा कि उनके पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि संबंधित सांसदों का मामला भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत आता है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि कोई सांसद अपनी पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है, जब तक कि यह कदम वैध विलय की श्रेणी में न आए। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब उनके पत्र पर सुनवाई होगी, तो सभापति संविधान और लोकतंत्र की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए निष्पक्ष निर्णय लेंगे। संजय सिंह का कहना है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा हुआ है।

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