Business Desk – Sun Pharma Buys Organon : सन फार्मा जो भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी है. Organon जो अमेरिका की एक बड़ी कंपनी है (इसका मुख्यालय न्यू जर्सी में है). 1.10 लाख करोड़ में खरीदने जा रही है. यह किसी भी भारतीय दवा कंपनी द्वारा अब तक की सबसे बड़ी विदेशी खरीद है.

दोनों कंपनियों ने सोमवार को इस सौदे के बारे में एक संयुक्त बयान जारी किया. समझौते की शर्तों के तहत, सन फार्मा Organon के सभी बकाया शेयर $14 प्रति शेयर की कीमत पर खरीदेगी. यह पूरा लेन-देन नकद में किया जाएगा. इस खरीद से सन फार्मा दुनिया की शीर्ष 25 दवा कंपनियों की सूची में शामिल हो जाएगी, जिससे इसकी बाजार पहुंच 150 देशों तक फैल जाएगी.
सन फार्मा दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी दवा कंपनी बनने की राह पर
बायोसिमिलर और बायोलॉजिकल दवाओं के अपने पोर्टफोलियो के साथ, सन फार्मा दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी दवा कंपनी बनने के लिए तैयार है. इसे 18 प्रमुख बाजारों तक पहुंच मिलेगी, जिनमें से प्रत्येक से ₹900 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है.
इस सौदे में Organon का बकाया कर्ज भी शामिल है, जो 81,000 करोड़ है. हालांकि, सन फार्मा ने कहा है कि इस खरीद के बाद, दोनों कंपनियों का संयुक्त राजस्व 1.16 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. इस लेन-देन के 2027 में पूरा होने की उम्मीद है.
वैश्विक स्तर पर सन फार्मा की क्या स्थिति है?
यह दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवा निर्माताओं में से एक है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹4 लाख करोड़ है. वैश्विक स्तर पर, यह 2,000 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो पेश करती है. यह पांच महाद्वीपों में 41 अत्याधुनिक विनिर्माण संयंत्रों का संचालन करती है, और इसका कारोबार 100 से अधिक देशों में फैला हुआ है.
Organon एक दवा कंपनी के तौर पर कितनी बड़ी है?
28,000 करोड़ के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के साथ, Organon की स्थापना 2021 में हुई थी, जब यह दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Merck & Co. से अलग हुई थी. आज, कंपनी की मौजूदगी 140 देशों में है, जिनमें चीन, अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ब्राजील शामिल हैं. इसमें 10,000 लोग काम करते हैं.
कंपनी के पास महिलाओं के स्वास्थ्य और सामान्य दवाओं के क्षेत्र में 70 से ज्यादा उत्पादों का पोर्टफोलियो है. इनमें सबसे खास है Nexplanon, जो गर्भनिरोधक के लिए इस्तेमाल होने वाला एक इम्प्लांट है. Organon अपने उत्पाद 60 देशों में बेचती है.
कंपनी की शुरुआत ₹10,000 के कर्ज से हुई थी
Sun Pharma के संस्थापक, दिलीप संघवी (71), मूल रूप से गुजरात के अमरेली जिले के रहने वाले हैं. उनका पूरा परिवार अभी मुंबई में रहता है. उनके शुरुआती दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा है. 1983 में, दिलीप ने अपने पिता शांतिलाल, जो खुद एक दवा कारोबारी थे. 10,000 उधार लेकर पांच दोस्तों के साथ मिलकर एक ही कमरे में Sun Pharma की नींव रखी थी. उस समय दिलीप खुद ही अपने सेल्समैन का काम करते थे. बिल्कुल एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) की तरह, वे डॉक्टरों से खुद मिलकर अपनी दवाओं के बारे में विस्तार से बताते थे.
1993 में, दिलीप ने ‘क्लोजापाइन’ (Clozapine) लॉन्च करने की योजना बनाई. यह एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल सिजोफ्रेनिया के इलाज में किया जाता है. हालांकि, उन्हें जल्द ही पता चला कि उनकी एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी, ‘सैंडोज़’ (Sandoz), भी 22 शहरों में ठीक उसी दवा को लॉन्च करने की तैयारी कर रही थी. सांघवी ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और तय समय-सीमा से तीन हफ़्ते पहले ही अपनी दवा लॉन्च कर दी.
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