गुरुग्राम। स्टिल्ट प्लस फोर निर्माण नीति को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि इस पर लगाई गई रोक केवल गुरुग्राम तक सीमित रहेगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि हरियाणा के अन्य जिलों में इस नीति के तहत चार मंजिल तक निर्माण पर फिलहाल कोई रोक लागू नहीं होगी।
कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि राज्य में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ चल रही बुलडोजर कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। सरकार को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।


गुरुग्राम की स्थिति पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने गुरुग्राम की बिगड़ती शहरी व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि शहर में फुटपाथ और सड़कें तक अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे आम लोगों के लिए पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
अदालत ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी अव्यवस्थित विकास के कारण लोग कई इलाकों को छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं। गुरुग्राम पहले से ही भारी आबादी और दबाव झेल रहा है, ऐसे में बिना योजना के निर्माण से स्थिति और बिगड़ सकती है।


नीति पर अभी अंतिम फैसला नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टिल्ट प्लस फोर नीति अभी न्यायिक समीक्षा के दायरे में है और इस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।


जनहित याचिका में उठे सवाल
इस मामले में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज कर चार मंजिला निर्माण की अनुमति दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार होनी चाहिए थी।
कोर्ट ने भी माना कि बिना मजबूत बुनियादी ढांचे के ऊंचे निर्माण की अनुमति देने से सीवरेज, ड्रेनेज, ट्रैफिक और जलभराव जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।