रूस ने दोस्ती निभाते हुए अपना चौथा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भारत के लिए रवाना कर दिया है. ये एयर डिफेंस सिस्टम मई महीने के मध्य तक भारतीय बंदरगाह पर पहुंच जाएगा. यह डिलवरी ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर हुई है. इसके अलावा पांचवें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को भी इस साल नवंबर तक भारत भेज दिया जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की कमर तोड़ने वाले इस डिफेंस सिस्टम ने शानदार प्रदर्शन किया था और इसने 314 किलोमीटर दूर पाकिस्तानी अवाक्स एयरक्राफ्ट को मारकर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया था.

भारत ने रूस के साथ पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के लिए 2018 में करार किया था जिनमें से तीन एस-400 पहले ही मिल चुके थे जबकि 2 एस-400 को सौंपने में काफी देरी हुई है. यह 5 अरब डॉलर की डील की थी. हालांकि मोदी सरकार ने पहले ही पांच और S-400 सिस्टम खरीदने की हरी झंडी दे दी है. इन सिस्टम में पाकिस्तान में सिंधु नदी के पूर्व में किसी भी हवाई लक्ष्य को नष्ट करने की क्षमता है और इनकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक है.

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अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद खरीद

भारत ने सात साल से भी पहले S-400 मिसाइलें खरीदने का सौदा किया था. उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर ‘काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट’ (CAATSA) के तहत अमेरिका भारत पर बैन लगा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत को अमेरिका के प्रतिबंधों से किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं है, क्योंकि यह नई खरीद पिछली खरीद का ही एक ‘फॉलो-ऑन’ ऑर्डर है.

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कितना घातक है S-400?

पिछले साल 7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने S-400 मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था. संघर्ष खत्म होने के कुछ हफ्तों बाद ही, S-400 मिसाइलों की एक और खेप खरीदने का प्रस्ताव पेश किया गया था.

रूस ने इन मिसाइल सिस्टम को चलाने के लिए भारतीय सैनिकों के एक समूह को पहले ही ट्रेनिंग दे दी है. S-400 को रूस का सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल रक्षा सिस्टम माना जाता है.

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