कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। MP OBC Reservation Hearing: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुनवाई जारी है। वहीं इस बीच सरकार की ओर से OBC का पक्ष रखने वाले दो विशेष अधिवक्ताओं को हटाये जाने पर OBC महासभा ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है।

ओबीसी महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार का कहना है कि पिछड़े वर्ग की तरफ से दो अधिवक्ता एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर और एडवोकेट विनायक शाह बात रख रहे थे। लेकिन मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता के कहने पर उन्हें हटाया गया है। आज मध्य प्रदेश सरकार का दोहरा रवैया सामने आ गया है। 

बार-बार ओबीसी महासभा जब मांग करती है तो उनसे अधिवक्ताओं के नाम मांगे जाते हैं। जब अधिवक्ता पिछड़े वर्ग की पैरवी करते हैं तो उन्हें इस बात को लेकर हटाया जाता है कि आप संगठन और सरकार की ओर से साथ में पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की जो कथनी है कि डंके की चोट पर ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा। उसमे अंतर दिखता है।जिस तरह से लगातार तारीख पर तारीख का मिशन चल रहा है यह सरकार का स्पष्ट रूप जनता के सामने आ चुका है।

कमलनाथ ने की OBC वर्ग से सतर्क रहने की अपील

शिखिल ब्यौहार, भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने OBC आरक्षण पर सुनवाई के बाद अपना बयान दिया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, मध्य प्रदेश में OBC वर्ग को 27% आरक्षण देने के मुद्दे पर हाईकोर्ट में अंतिम और विस्तृत सुनवाई शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश के OBC वर्ग को वर्ष 2019 में मेरे मुख्यमंत्री कार्यकाल में यह आरक्षण दिया गया था। लेकिन मेरे पद से हटने के बाद से भाजपा OBC आरक्षण की हत्या करने में जुटी है। मैं OBC वर्ग से आग्रह करता हूँ कि वे सतर्क रहें। भाजपा फिर कोई नई चाल चल सकती है।

 कमलनाथ ने आगे कहा कि OBC आरक्षण के 7 साल के इतिहास पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार ने अदालत को भी गुमराह करने की कोशिशें की हैं। मार्च 2019 में मेरी तत्कालीन सरकार ने प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण देने का फैसला किया। 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज के लिए 27% ओबीसी आरक्षण पर स्थगन दिया। यहां उल्लेखनीय है कि स्थगन सिर्फ कुछ नौकरियों के लिए था। ओबीसी के 27% रिजर्वेशन की सभी बाधाओं को दूर करने के लिए जुलाई 2019 में मेरी सरकार ने विधानसभा से 27% ओबीसी आरक्षण का कानून भी पास कर दिया था।

उन्होंने आगे कहा कि यह मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग के प्रति लिया गया सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला था। लेकिन बाद में मेरी सरकार को षडयंत्रपूर्वक गिरा दिया गया और मार्च 2020 में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। भाजपा सरकार ने ओबीसी के खिलाफ षड्यंत्र शुरू किया। हाई कोर्ट का आदेश सिर्फ कुछ पदों पर लागू होना था लेकिन भाजपा सरकार ने पूरे प्रदेश में सभी जगह यह आदेश लागू कर 27% आरक्षण की हत्या कर दी। 18 अगस्त 2020 को भाजपा सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने उच्च न्यायालय में यह मत दिया कि 14% आरक्षण के साथ ही सभी सरकारी विभागों में भर्तियां की जाएं। यह ओबीसी वर्ग के साथ खुला षड्यंत्र था।

कमलनाथ ने कहा कि जनवरी 2021 में बीजेपी सरकार ने हाई कोर्ट में आवेदन दिया की 14% आरक्षण के साथ ही भर्तियां कर ली जाएं और 13% आरक्षण को होल्ड पर रखा जाए। भाजपा सरकार के इस अभिमत के बाद जुलाई 2021 को हाईकोर्ट ने 14% ओबीसी आरक्षण के साथ भर्ती करने का और 13% आरक्षण को होल्ड करने का आदेश दिया।  इस तरह भारतीय जानता पार्टी ने षड्यंत्रपूर्वक 27% आरक्षण को समाप्त करने के काम किया है। पूर्व इतिहास देखते हुए इस बार बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है क्योंकि भाजपा किसी भी स्थिति में OBC आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश करेगी।

सुनवाई से 11 घंटे पहले स्पेशल काउंसिल को हटाने का ऑर्डर जारी

कुमार इंदर, जबलपुर। ओबीसी 27% आरक्षण मामके की सुनवाई फिर टल गई है। अब 13 से 15 मई को मामले की सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट से कुछ याचिका हाई कोर्ट न पहुंचने का हवाला दिया गया था। विरोधी पक्ष के एक वकील ने इस दौरान अजब दलील दी। उन्होंने समर वेकेशन के बाद सुनने की अपील की। लेकिन सुनवाई से पहले उस वक्त नया मोड़ आ गया जब सरकार की ओर से नियुक्त दो विशेष अधिवक्ताओं को इस केस से हटा दिया गया। 

विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह को राज्यपाल ने नियुक्त किया था। लेकिन सुनवाई से ठीक 11 घंटे पहले स्पेशल काउंसिल को हटाने का ऑर्डर जारी कर दिया गया। रात करीब 12 बजे आदेश का लेटर जारी हुआ। रात 11 बजकर 50 मिनट पर डिजिटल सिग्नेचर ऑर्डर पर हुए।मामले में सरकार का तर्क था कि स्पेशल काउंसिल की वजह से केस सुपरशीड हो रहा था। 

14 सितम्बर, 2021 को सरकार ने स्पेशल काउंसिल नियुक्त किया था। दोनों वकीलों की स्पेशल काउंसिल नियुक्त करने के बाद करीब 50 बार सुनवाई  हो चुकी है।  ओबीसी आरक्षण के प्रकरण में कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने नई अधिसूचना जारी की गई। चलती सुनवाई से विशेष अधिवक्ताओं को हटाने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। 

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