Rajasthan News: कहते हैं कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का हक है, लेकिन जब चुनाव की ड्यूटी बच्चों के भविष्य पर भारी पड़ने लगे, तो मासूमों को भी सड़क पर उतरना पड़ता है। राजस्थान के बूंदी जिले के नैनवा उपखंड में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां नन्हे छात्रों और उनके अभिभावकों के आक्रोश ने प्रशासन को तत्काल फैसले बदलने पर मजबूर कर दिया।

एक अकेला मास्टर, वो भी चुनाव की ड्यूटी में तैनात

मामला नैनवा के रलरी गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का है। इस स्कूल की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ एक शिक्षक इकरामउद्दीन के कंधों पर थी। सिस्टम का मजाक देखिए कि फरवरी महीने से ही वे चुनाव ड्यूटी (BLO कार्य) में तैनात थे। पिछले कई महीनों से स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह ठप थी। प्रशासन ने खानापूर्ति के लिए रोटेशन पर दूसरे स्कूलों से शिक्षक तो भेजे, लेकिन यह कामचलाऊ तरीका बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ साबित हो रहा था।

हमें पढ़ना है, मास्टर लाओ

मंगलवार को जब बच्चों और अभिभावकों के सब्र का बांध टूटा, तो नजारा देखने लायक था। ग्रामीणों ने पहले स्कूल के गेट पर ताला जड़ा और फिर बच्चों को लेकर सीधे उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) कार्यालय पहुंच गए। हाथ में स्लोगन लिखी तख्तियां लिए मासूम बच्चे जोर-शोर से नारे लगाने लगे हमें पढ़ना है, हमारे स्कूल में मास्टर लगाओ। अभिभावकों ने दो टूक कहा कि चुनाव जरूरी हो सकते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य दांव पर लगाकर नहीं।

6 शिक्षकों को चुनावी काम से हटाया

प्रदर्शन की गंभीरता और बच्चों की आंखों में पढ़ाई की ललक देख प्रशासन तुरंत हरकत में आया। दोपहर होते-होते नैनवा एसडीएम ने एक बड़ा आदेश जारी किया। इसमें पंचायत और निकाय चुनाव 2026 की मतदाता सूची तैयार करने में लगे 6 शिक्षकों को तुरंत चुनावी ड्यूटी से कार्यमुक्त कर उनके मूल स्कूलों में भेज दिया गया।

इन शिक्षकों की हुई घर वापसी

प्रशासन ने जिन शिक्षकों को वापस स्कूलों में भेजा है उनमें इकरामउद्दीन (रलरी), रमेश कुमार शर्मा (गुराजनिया), सुरेंद्र कुमार बैरवा (बड़ी पाडप), तुलसीराम मीणा (मोडसा), अविश्रांत पुरोहित (सुवानिया) और मनोज कुमार शर्मा (देई) शामिल हैं। एसडीएम के आदेश के बाद अब इन स्कूलों में फिर से रौनक लौटेगी।

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