हेमंत शर्मा, इंदौर। देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट पर करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए टर्मिनल-1 को लेकर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जिस टर्मिनल का धूमधाम से उद्घाटन किया गया, वही आज तक यात्रियों के लिए शुरू नहीं हो पाया। उद्घाटन के बाद भी टर्मिनल बंद है, और अब जो तस्वीर सामने आई है, वह केवल देरी ही नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही की कहानी भी बयां कर रही है।
बताया जा रहा है कि टर्मिनल को शुरू करने के लिए CISF जवानों और स्टाफ की कमी सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है। इसको लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से पत्राचार भी किया जा चुका है, लेकिन हालात जस के तस हैं। सवाल ये है कि जब जरूरी व्यवस्थाएं पूरी ही नहीं थीं, तो फिर उद्घाटन की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? लेकिन असली चौंकाने वाली तस्वीर तब सामने आई जब lalluram.com की टीम मौके पर पहुंची।
यहां टर्मिनल-1 पर काम कर रहे कर्मचारि की हालत देखकर हर कोई हैरान रह गया। लगभग 50 फीट ऊंचाई पर मजदूर एक पाइप के सहारे खड़े होकर ड्रिल मशीन से काम करते नजर आए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि उनके पास कोई भी सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं था,न हेलमेट, न सेफ्टी बेल्ट, न ही कोई अन्य सुरक्षा इंतजाम।
जब टीम ने कर्मचारी से सवाल किया तो जवाब और भी डराने वाला था। मजदूरों ने साफ कहा कि “हमें इसी तरह काम करना पड़ता है, हमारे पास कोई संसाधन नहीं दिए जाते।” यह बयान सीधे तौर पर ठेकेदार कंपनी की लापरवाही को उजागर करता है। यहां काम का ठेका जिस कंपनी एग्रो मैक्स के पास है, उस पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों का टेंडर लेने वाली कंपनी क्या अपने ही कर्मचारियों की जान की कीमत भूल गई है? क्या मुनाफे के आगे मजदूरों की सुरक्षा कोई मायने नहीं रखती?
सबसे बड़ा सवाल एयरपोर्ट अथॉरिटी की भूमिका पर भी उठता है। जिस जगह पर यह काम चल रहा है, वहां एयरपोर्ट के कई अधिकारी और कर्मचारी लगातार आते-जाते रहते हैं। ऐसे में क्या किसी की नजर इन कर्मचारियों पर नहीं पड़ी? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? यह मामला सिर्फ एक ठेकेदार की लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है। एक तरफ सरकार आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ उसी प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।
अगर इसी तरह लापरवाही जारी रही, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। और उस हादसे की जिम्मेदारी कौन लेगा? ठेकेदार कंपनी, एयरपोर्ट अथॉरिटी या फिर वो सिस्टम जिसने बिना पूरी तैयारी के उद्घाटन कर दिया?
इंदौर जैसे शहर में, जिसे देश में बेहतर व्यवस्थाओं के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की तस्वीरें बेहद चिंताजनक हैं। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला दबकर रह जाएगा।

