कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बड़े फैसले के तहत पार्टी ने यह साफ किया है कि उसके कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरा ही गाए जाएंगे. बैठक में कई नेताओं ने 1937 के पार्टी के स्टैंड को दोहराया. राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी ने साल 1937 में अपनाए गए अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव और रुख पर दोबारा मुहर लगा दी है.

वहीं BJP ने निशाना साधते हुए कहा है कि कांग्रेस एक बार फिर 90 साल पुरानी गलती दोहरा रही है. कांग्रेस ने खुलकर एलान कर दिया है कि वो वंदे मातरम को पूरा नहीं गाएंगे.

CWC की बैठक में वंदे मातरम को लेकर 1937 के कांग्रेस के फैसले का जिक्र किया गया. उस समय CWC की बैठक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना आजाद और गोविंद वल्लभ पंत समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. जयराम रमेश ने बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद उस प्रस्ताव को पारित किया गया था.

दरअसल, यह विवाद 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह से शुरू हुआ था. जिसमें राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी आपस में बातचीत करते दिखे. BJP ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत गाते समय सोनिया गांधी ने रोका था. जिसके बाद से यह इश्यू बनता चला गया.

CWC की बैठक में आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या बढ़ाने की जरूरत नहीं है.

वहीं BJP के रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस ने 90 साल पहले मुस्लिम लीग के दबाव में जो गलती की थी, उसे मुस्लिम वोट के चक्कर में कांग्रेस आज भी दोहरा रही है. इस पर महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने पलटवार करते हुए कहा कि BJP उन्हें देशभक्ति ना सिखाए.

मुख्य रूप से इस बात को समझा जाए तो राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि हमारा स्टैंड पहले दिन से बिल्कुल साफ रहा है, 28 अक्टूबर 1937 का जो वर्जन है, 24 जनवरी 1950 संविधान सभा के आखिरी बैठक में, डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने दोहराया था कि जन-गन-मन राष्ट्रीय गान होगा और वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत होगा.

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