आगामी मानसून सीजन के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने राज्यभर में आपदा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने और 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय करने के आदेश जारी किए हैं।
चंडीगढ़। आगामी मानसून सीजन और संभावित प्राकृतिक आपदाओं के मद्देनजर हरियाणा सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। राज्य में संभावित बाढ़, हीटवेव और सूखे जैसी स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार ने व्यापक स्तर पर सुरक्षा इंतजाम और प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन प्रणाली को दुरुस्त करें। सरकार का मुख्य उद्देश्य जिला और राज्य स्तर पर एक मजबूत ‘समन्वित प्रतिक्रिया प्रणाली’ (Coordinated Response System) को स्थापित करना है ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
24×7 सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम और नोडल अधिकारी
डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पंचकूला स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहले से ही 24 घंटे कार्यरत है। इसी तर्ज पर सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मई के मध्य तक जिला स्तरीय विशेष बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना सुनिश्चित करें। इन केंद्रों पर रियल-टाइम को-ऑर्डिनेशन और सटीक रिपोर्टिंग के लिए समर्पित नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि इन केंद्रों पर उच्च स्तरीय इंटरनेट कनेक्टिविटी, संचार प्रणाली और पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध हो। साथ ही, संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखने पर जोर दिया गया है।
विभिन्न विभागों को सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां
आपदा प्रबंधन की इस रणनीति में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। डॉ. मिश्रा के अनुसार, सूखे की स्थिति की निगरानी के लिए कृषि और किसान कल्याण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। वहीं, सिंचाई और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) को बांधों की मजबूती और जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम) को सुदृढ़ करने का जिम्मा मिला है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा सेवाओं और कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए अलर्ट पर रखा गया है। बिजली विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि आपदा के दौरान भी महत्वपूर्ण सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित न हो।

