जयपुर। Vasundhara Raje Fake Letter: पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी लेटर और एडिटेड वीडियो वायरल करने के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। जयपुर की ट्रायल कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। लिंक जज श्रृंगिका जाजू ने सोहना (पंजाब) की अमृता धूमाल समेत मध्यप्रदेश के बिलाल खान, इमाम अहमद और निखिल प्रजापत को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

एफआईआर में नाम नहीं, जबरन फंसाया गया
सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मूल एफआईआर में इन चारों का नाम शामिल नहीं था और इन्हें केवल राजनीतिक द्वेषवश फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस जिन आरोपों की जांच कर रही है, उसमें काफी लंबा समय लग सकता है, ऐसे में आरोपियों को जेल में रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद चारों की जमानत मंजूर कर ली।
निजी चैनल के लोगो का हुआ था गलत इस्तेमाल
मामले की शुरुआत एक निजी न्यूज़ चैनल की शिकायत से हुई थी। ज्योति नगर थाने में दर्ज मुकदमे के मुताबिक, आरोपियों ने चैनल के लोगो, एंकर की क्लिप और बैकग्राउंड का इस्तेमाल कर एक वीडियो एडिट किया था। इस वीडियो के साथ वसुंधरा राजे के फर्जी लेटर को वायरल किया गया, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर भाजपा के खिलाफ बातें लिखी गई थीं। पुलिस ने इस मामले में जालसाजी और प्रतिष्ठा धूमिल करने की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था।
एमपी पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े लोगों को दबोचा था
जब यह फर्जी लेटर और वीडियो वायरल हुआ, तो खुद वसुंधरा राजे ने सामने आकर इसका खंडन किया था और इसे विरोधियों की साजिश बताया था। मामले की जांच करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े इन चार लोगों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद जयपुर पुलिस इन्हें ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान लेकर आई थी।
सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है और साइबर एक्सपर्ट्स यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस फर्जी कंटेंट का ओरिजिनल सोर्स क्या था। फिलहाल, कोर्ट के इस फैसले से आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।
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