GJU में प्रशासनिक फेरबदल और जांच की मांग को लेकर छात्रों का अल्टीमेटम जारी है। पुलिस को मिली क्लीन चिट और कुलपति का कार्यकाल बढ़ने से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हिसार के गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) में चल रहा छात्र आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बीते 27 तारीख को हुई विशाल छात्र महापंचायत के बाद गठित 21 सदस्यीय कमेटी ने प्रशासन को अपनी मांगों को लेकर 5 दिन का समय दिया था। इस अल्टीमेटम के अब केवल 3 दिन शेष बचे हैं, लेकिन छात्रों और प्रशासन के बीच सहमति बनती नहीं दिख रही है। कमेटी ने पहले ही एडीजीपी (ADGP) और पुलिस कमिश्नर के समक्ष अपनी मांगों का एजेंडा स्पष्ट कर दिया था, जिसमें विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग प्रमुखता से शामिल है।
क्लीन चिट और कुलपति के कार्यकाल ने बढ़ाई तल्खी
पिछले दो दिनों के घटनाक्रम ने आंदोलनकारियों के बीच असंतोष को और गहरा कर दिया है। एक ओर जहां एडीजीपी ने इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका को क्लीन चिट दे दी है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने मौजूदा कुलपति का कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया है। छात्रों के नजरिए से इन फैसलों को उनकी मांगों की अनदेखी के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों का तर्क है कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव या ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। सरकार की ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति ने कमेटी को अपने अगले कदम के लिए और अधिक आक्रामक होने पर मजबूर कर दिया है।
निर्णायक समाधान या फिर नई महापंचायत?
फिलहाल स्थिति सीधे टकराव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। यदि अगले 72 घंटों के भीतर प्रशासनिक स्तर पर कोई बड़ा समाधान या मांगों पर सकारात्मक सहमति नहीं बनी, तो छात्र नेताओं ने एक और बड़ी महापंचायत बुलाने का संकेत दिया है। आंदोलनकारी छात्रों का स्पष्ट कहना है कि इस बार आंदोलन का स्वरूप पहले से कहीं अधिक बड़ा और व्यापक होगा। प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने की सरकार की कोशिश और जवाबदेही की छात्रों की मांग के बीच का यह संघर्ष अब पूरे प्रदेश की नजरों में है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह समाधान का रास्ता चुनता है या आंदोलन को उग्र होने देता है।

