Bastar News Update: दंतेवाड़ा। जिले में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई तेज हो गई है। गुमलनार क्षेत्र में टीम ने ग्राहक बनकर जाल बिछाते हुए तेंदुए की खाल के साथ 5 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में सुन्दरलाल, धरमू सिमरथ, दियालू, दिनेश कश्यप और गोबरू यादव शामिल हैं। उनके पास से शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे भी बरामद किए गए हैं।

narayana

पिछले दो महीनों में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जो जिले में वन्यजीव अपराध की गंभीरता को दर्शाती है। वहीं अब सोशल मीडिया भी जांच का अहम माध्यम बन रहा है। इंस्टाग्राम रील के आधार पर बारसूर क्षेत्र से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से भालू की खाल और विशाल गिलहरी के अवशेष मिले।

पूछताछ में वन विभाग को एक संगठित शिकार गिरोह के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। इससे पहले भी तेंदुए की खाल और बाघ शावक से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी हो चुकी है। लगातार हो रही कार्रवाई से तस्करों में हड़कंप है, हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या ये प्रयास जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैं।

बच्चा चोरी की अफवाह से बवाल, गुस्साई भीड़ ने वाहनों में की तोड़फोड़

लोहंडीगुड़ा। इलाके में बच्चा चोरी की अफवाह फैलने से हड़कंप मच गया, जिससे पूरा क्षेत्र तनावपूर्ण हो गया। फेरीवालों द्वारा एक बच्चे को पकड़ने की घटना के बाद स्थिति और अधिक बिगड़ गई और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। इसके बाद भीड़ ने संदिग्ध फेरीवालों को घेर लिया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। गुस्साई भीड़ ने तीन से चार वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें पलट दिया, जिससे फेरीवालों को भारी नुकसान हुआ।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। फेरीवाला परिवार को सुरक्षित थाने पहुंचाया गया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला अफवाह से जुड़ा पाया गया है, हालांकि बच्चे को पकड़ने की घटना को लेकर अभी भी जांच जारी है।

बताया जा रहा है कि इससे पहले बहारगुड़ा क्षेत्र में बच्चे के लापता होने की घटना के कारण लोगों में पहले से ही डर का माहौल था, जिससे अफवाह तेजी से फैल गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

बस्तर के माचकोट जंगल में वन्यजीव की हलचल से दहशत

बस्तर। माचकोट वन परिक्षेत्र में बड़े वन्यजीव की मौजूदगी ने ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। करीब दो महीने पहले क्षेत्र में पंजों के निशान मिलने के बाद से ग्रामीण सतर्क हैं। हालांकि अब तक किसी तरह के हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बाघ नहीं बल्कि तेंदुआ हो सकता है, क्योंकि इलाके में मवेशियों के शिकार की घटनाएं सामने आई हैं। बस्तर क्षेत्र में पहले भी तेंदुए की मौजूदगी के प्रमाण मिल चुके हैं। इससे पहले मारडूम इलाके में तेंदुआ घर के पास तक पहुंच गया था।

हर साल गर्मी के मौसम में ऐसे संकेत सामने आते हैं, लेकिन इस बार दहशत अधिक है क्योंकि वन्यजीव की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है। वन विभाग ने अभी तक पंजों के निशान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

ग्रामीणों ने अपनी आवाजाही सीमित कर दी है और रात में सतर्कता बढ़ा दी है। वन विभाग की टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही है। फिलहाल जंगल की यह अनिश्चित स्थिति लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।

सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण पर मौसम का असर, 35 हजार से अधिक बोरा संग्रहित

सुकमा। जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण पर इस बार मौसम का स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुई ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण कई क्षेत्रों में पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिसके चलते मानक से कम पत्तों को अलग किया जा रहा है।

इसके बावजूद जिले में खरीदी प्रक्रिया लगातार जारी है। सुकमा में कुल 727 फड़ संचालित हैं, जिनमें से 350 फड़ सक्रिय हो चुके हैं। अब तक 35 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है।

विभाग के अनुसार दूरस्थ इलाकों में संग्रहण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ क्षेत्रों में देरी को सामान्य बताया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और संग्राहकों को उचित लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगामी एक सप्ताह में सभी संग्रहण केंद्रों के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।

विभाग का लक्ष्य गुणवत्ता के साथ अधिकतम तेंदूपत्ता संग्रहण सुनिश्चित करना है, ताकि मौसम की चुनौतियों के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

सुकमा में तेंदूपत्ता संग्रहण पर मौसम का असर

सुकमा। जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण पर इस बार मौसम का स्पष्ट असर देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुई ओलावृष्टि और खराब मौसम के कारण कई क्षेत्रों में पत्तों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिसके चलते मानक से कम पत्तों को अलग किया जा रहा है।

इसके बावजूद जिले में खरीदी प्रक्रिया लगातार जारी है। सुकमा में कुल 727 फड़ संचालित हैं, जिनमें से 350 फड़ सक्रिय हो चुके हैं। अब तक 35 हजार से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जा चुका है।

विभाग के अनुसार दूरस्थ इलाकों में संग्रहण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कुछ क्षेत्रों में देरी को सामान्य बताया गया है।

अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है और संग्राहकों को उचित लाभ दिलाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आगामी एक सप्ताह में सभी संग्रहण केंद्रों के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।

विभाग का लक्ष्य गुणवत्ता के साथ अधिकतम तेंदूपत्ता संग्रहण सुनिश्चित करना है, ताकि मौसम की चुनौतियों के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

संजीवनी 108 एंबुलेंस सेवा की बदहाल स्थिति से बढ़ी ग्रामीणों की मुश्किलें

नारायणपुर। संजीवनी 108 एंबुलेंस सेवा में नई कंपनी की जिम्मेदारी संभालने के बाद व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। तैयारियों की कमी के कारण कई खामियां सामने आ रही हैं, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

जानकारी के अनुसार, नई एंबुलेंस बिना पंजीयन नंबर के ही सड़कों पर संचालित हो रही हैं। वहीं सिस्टम अपडेट न होने से लोकेशन ट्रैकिंग भी पूरी तरह से बाधित है। कॉल करने पर मरीजों को “गाड़ी व्यस्त है” जैसे जवाब मिल रहे हैं, जिससे समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पा रही।

एक गंभीर मामले में मरीज को 19 किलोमीटर तक खटिया पर ले जाना पड़ा, जिससे व्यवस्था की बड़ी खामी उजागर हुई है।

सबसे बड़ी समस्या जिम्मेदार समन्वयक की अनुपस्थिति और शिकायत निवारण की स्पष्ट व्यवस्था का न होना बताया जा रहा है। जिला अस्पताल में एंबुलेंस खड़ी रहने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को समय पर सुविधा नहीं मिल पा रही है।

तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही अब मरीजों के लिए खतरा बनती जा रही है। स्थानीय लोगों ने तत्काल सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

रतेंगा में जल संकट गहराया, बदबूदार पानी से ग्रामीण परेशान

बस्तर। जिले के रतेंगा क्षेत्र में जल संकट अब गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है। हैंडपंपों से पानी तो निकल रहा है, लेकिन वह बदबूदार होने के कारण पीने योग्य नहीं है। ग्रामीण इस पानी का उपयोग केवल निस्तारी कार्यों में कर रहे हैं।

पीने के पानी के लिए लोग झरिया जैसे असुरक्षित स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में जलस्तर और नीचे चले जाने से स्थिति और भी खराब हो गई है। सालेभाटा पारा सहित कई गांव इस समस्या से प्रभावित हैं।

स्थानीय महिलाओं का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है। इससे पहले बाकेल क्षेत्र में फ्लोराइड युक्त पानी के कारण लोग बीमार पड़ चुके हैं, जिसके बाद पाइपलाइन से जल आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी।

हालांकि रतेंगा क्षेत्र में अब तक ठोस सुधार नहीं हो सका है। प्रशासन की ओर से भी कोई प्रभावी पहल नहीं दिख रही है, जिससे ग्रामीण मजबूरी में असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग करने को विवश हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह समस्या गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

बस्तर में साहू समाज ने मनाई भामाशाह जयंती

बस्तर। जिले में साहू समाज द्वारा भामाशाह जयंती उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन हिंगलाजिन मंदिर परिसर में किया गया, जहां भक्त माता कर्मा की आरती के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

इस अवसर पर वक्ताओं ने भामाशाह के त्याग और योगदान को याद करते हुए महाराणा प्रताप के प्रति उनके समर्पण को प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम के दौरान समाज के नए परिवारों का परिचय भी कराया गया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

यह आयोजन सामाजिक एकता का महत्वपूर्ण मंच भी बना, जहां युवा पीढ़ी को अपनी परंपरा और विरासत से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम में अध्यक्ष गणेश राम साहू सहित समाज के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

समाज के सदस्यों ने इस अवसर पर एकजुटता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया, जिससे यह आयोजन परंपरा और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने वाला साबित हुआ।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H