अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन ‘स्वरूप’ उपलब्ध करवाने की सेवा को 20 मई तक अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह निर्णय हाल ही में पारित जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026 के तहत एक नई डिजिटल नीति और नियमों में बदलाव के कारण लिया गया है।

एसजीपीसी के सचिव बलविंदर सिंह काहलवां ने बताया कि नई डिजिटल प्रणाली को पूरी तरह से लागू करने के लिए यह अस्थायी रोक लगाई गई है। अब 20 मई के बाद ही नई नीति के तहत स्वरूपों का वितरण फिर से शुरू होगा। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य पावन स्वरूपों की मर्यादा, पारदर्शिता और सही रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है।

एसजीपीसी अध्यक्ष हरजंदर सिंह धामी के निर्देशानुसार विकसित किए जा रहे नए सिस्टम में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रत्येक स्वरूप का एक डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाएगा, जिसे एसजीपीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकेगा। अब संगत की मांग आने पर ही पावन स्वरूपों का प्रकाशन (छपाई) होगा। इसके लिए संगत को कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।

प्रत्येक स्वरूप को एक विशिष्ट आईडी नंबर दिया जाएगा, जो एसजीपीसी के सर्वर पर सुरक्षित रहेगा। स्वरूप प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पहचान और फोटो डिजिटल फॉर्मेट में दर्ज की जाएगी। साथ ही, एक प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा जिसमें मर्यादा और देखरेख से संबंधित निर्देश होंगे। प्राप्तकर्ता को इन नियमों के पालन का वचन भी लेना होगा।नियमों में सख्ती और वितरण केंद्रनई नीति के तहत मर्यादा को लेकर कुछ कड़े कदम भी उठाए गए हैं।

अकाल तख्त के 2013 के हुक्मनामे के अनुसार, कब्रों, स्मारकों या पूर्वजों के स्थानों पर अखंड पाठ करने पर पावन स्वरूप ले जाने पर पाबंदी को अब सख्ती से लागू किया जाएगा। अब पावन स्वरूप विशेष रूप से अमृतसर स्थित गुरु ग्रंथ साहिब भवन (गुरुद्वारा श्री रामसर साहिब) से ही उपलब्ध होंगे। अब ये तख्त साहिबान या अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों से प्राप्त नहीं किए जा सकेंगे।